सुप्रीम कोर्ट ने 20 से जुलाई 25 के बीच हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट से जुड़ी सभी एफआईआर को रद्द करने और इस मामले को बंद करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में दर्ज की गई FIR पर आगे कोई जांच या कार्रवाई नहीं की जाएगी। इन सभी केसों को हमेशा के लिए बंद माना जाएगा. इस पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने हाथ जोड़कर जजों को धन्यवाद कहा. जिसके बाद चीफ जस्टिस ने उन्हें शुभकामनाएं दीं. इस मामले पर सुनवाई पूरी हो गई है.
सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द करने का फैसला सुनाया
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों से जो वादे किए उसे पूरा करना चाहती है, जिसमें मुकदमे वापस लेने, भविष्य में इन मामलों के लिए एफआईआर न करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए मुआवजा देने जैसी बातें शामिल है. कोर्ट ने कहा कि 3 महीने में नीति बने, जिसके तहत आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को मुआवजा मिल सके. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आर्टिकल-142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये फैसला सुनाया है.
इन लोगों पर जांच जारी रहेगी
कोर्ट ने कहा कि वह यह फैसला उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए ले रहा है जिन्होंने ईमानदारी और नेक नीयत से आंदोलन में हिस्सा लिया था. दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ी सिर्फ एक FIR पर जांच जारी रखने की इजाजत दी गई है. यह मामला उन 2,873 लोगों के खिलाफ है, जो गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड हत्या, रेप, अपहरण के आरोपी रहे हैं. एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र ने 25 जुलाई को आंदोलनकारियों के नेताओं को आश्वासन दिया था कि दर्ज केस वापस लिए जाएंगे और आगे कोई केस दर्ज नहीं होगा.
सीजेआई ने की सौरव दास की तारीफ
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और सरकार के आश्वासन के बाद सीजेपी के सौरव दास ने कहा, ‘हम इस आदरणीय कोर्ट और सभी वकीलों को धन्यवाद देते हैं. 5 सितंबर के मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है.’ चीफ जस्टिस ने उनके इस फैसले की तारीफ की.
कोर्ट ने केंद्र सरकार को पूरे देश में मुआवजा भुगतान के लिए एक नीति बनाने का आदेश दिया है. इस नीति को सभी संबंधित राज्य सरकारों और लागू करने वाले प्राधिकारियों को भेजा जाएगा, ताकि इसे मुआवजा देने के लिए एक व्यवस्था बनाई जा सके. नीट 2026 से संबंधित मामलों के कारण जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, यह नीति बनने के बाद उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा. सरकार को यह नीति तीन महीने की समय सीमा के भीतर तैयार करनी होगी.
