इलाहाबाद हाईकोर्ट से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को एक बड़े मामले में बड़ी राहत मिली है. दो अलग अलग पैन कार्ड रखने से जुड़े मामले में अदालत ने पिता और पुत्र दोनों की जमानत अर्जी को स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को भी निलंबित कर दिया है. हालांकि दोनों नेताओं के लिए यह राहत पूरी तरह से बेदाग नहीं है, क्योंकि अदालत ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग को सिरे से ठुकरा दिया है. जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों नेताओं की ओर से दाखिल की गई याचिका पर यह अहम फैसला सुनाया है.
निचली अदालत के फैसले को दी थी चुनौती
यह पूरा विवाद अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाण पत्र और दो अलग अलग पैन कार्ड बनवाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है. इस मामले में रामपुर की निचली अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम दोनों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी. निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ दोनों नेताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. उन्होंने अदालत में क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की थी. इस याचिका के जरिए अदालत से मुख्य रूप से तीन मांगें की गई थीं, जिनमें निचली अदालत की दोषसिद्धि पर रोक लगाना, सजा को निलंबित करना और मामले का अंतिम निपटारा होने तक अंतरिम जमानत पर रिहा करना शामिल था.
फैसले को लेकर अदालत ने सुरक्षित रखा था आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले पर लंबी और तीखी बहस देखने को मिली थी. अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों की दलीलों को विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने पंद्रह अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. फैसले के इंतजार में बैठे आजम समर्थकों के लिए अब जाकर राहत भरी खबर सामने आई है. अदालत ने दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद अपना अंतिम निर्णय सुनाया है. इस फैसले के बाद दोनों नेताओं के जेल से बाहर आने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं, जिससे समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है.
आधी राहत और आधी चुनौती बरकरार
अदालत का यह फैसला कानूनी नजरिए से बहुत संतुलित माना जा रहा है. हाईकोर्ट ने आजम खान और उनके बेटे को जमानत देकर और सजा पर रोक लगाकर जेल से बाहर आने की राह तो आसान कर दी है, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक न लगाकर एक बड़ा झटका भी दिया है. कानूनी जानकारों के अनुसार जब तक किसी जनप्रतिनिधि या नेता की दोषसिद्धि पर अदालत पूरी तरह से रोक नहीं लगाती, तब तक उनके चुनाव लड़ने और राजनीतिक भविष्य पर खतरे के बादल मंडराते रहते हैं. दोषसिद्धि बरकरार रहने की वजह से अब्दुल्ला आजम के चुनावी भविष्य पर लगे कानूनी प्रतिबंध फिलहाल जारी रह सकते हैं.
अन्य कानूनी मामलों का भी बना हुआ है दबाव
आजम खान और उनके परिवार की मुश्किलें केवल इसी एक मामले तक सीमित नहीं हैं. हाल के दिनों में प्रवर्तन निदेशालय ने भी उनके खिलाफ अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है. धन शोधन निवारण कानून के तहत कार्रवाई करते हुए जांच एजेंसी ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी कई जमीनों और इमारतों को कुर्क कर लिया है. इस विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा रहा है. ऐसे में पैन कार्ड मामले में जमानत मिलना आजम परिवार के लिए एक बड़ी राहत जरूर है, लेकिन अन्य मामलों में चल रही कानूनी कार्रवाइयों से उनका पीछा अभी पूरी तरह से नहीं छूटा है.
