बाबा बागेश्‍वर के मछली वाले बयान पर बंगाल में बवाल, BJP ने कहा- ‘कोई क्या खाता है, यह उसकी अपनी पसंद’

बाबा बागेश्वर ने दुर्गा पूजा के दौरान मांस खाने वालों को पाखंडी बता दिया तो बवाल मच गया. थाना-कचहरी की नौबत आ गई है. लिहाजा बीजेपी इस एपिसोड से असहज दिख रही है. बाबा बागेश्वर ‘हनुमान कथा’ करने बंगाल पहुंचे तो सुवेंदु अधिकारी समेत उनकी कैबिनेट दंडवत नजर आई. इसी बीच बंगाल के धार्मिक पंडालों का जिक्र करते हुए बाबा बागेश्वर ने पूजा-प्रसादी का हवाला देते हुए शक्ति पूजा के दौरान नॉनवेज बैन करने की डिमांड करके राज्य की सियासत गरमा दी है.

कांग्रेस पार्टी आज बाबा बागेश्वर के खिलाफ दोपहर 12 बजे दक्षिण कोलकाता में FIR दर्ज कराने जा रही है. कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं को थाने के सामने जमा होने को कहा है. कांग्रेस ने बाबा पर बंगाली समाज के अपमान करने का आरोप लगाया है. टीएमसी नेताओं के तेवर भी इस मैटर पर तीखे दिख रहे हैं.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने संभाला मामला

इसी साल हुए विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी ने कहा था कि बीजेपी आ गई तो बंगालियों का मच्छी खाना बंद करा देगी, चुनावों में तो ये मुद्दा नहीं बना, लेकिन 4 मई को बीजेपी की सरकार बनने के 4 महीने बाद दक्षिणपंथी पार्टी के फेवरेट बाबाओं में से एक ने नॉनवेज पर अपना प्रवचन दिया तो बीजेपी के अंदर ही कई लोग उनकी इस मांग से असहज नजर आए. बाबा की डिमांड कहीं और तूल न पकड़ ले, इसलिए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने तत्काल डैमेज कंट्रोल की कोशिश शुरू कर दी.

क्या बोले थे धीरेंद्र शास्त्री

धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान दुर्गा प्रतिमा के आसपास मांसाहारी भोजन न बेचने की अपील की. मंच से ​ उन्होंने बंगाली हिंदुओं से नवरात्रि मनाने का भी आह्वान करते हुए कहा, ‘दुर्गा पूजा के दौरन मांसाहारी भोजन करने वाले ‘विधर्मी’ हैं. इसलिए पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन छोड़ देना चाहिए.’

इसके साथ बाबा ने हिंदुओं से नॉनवेज न बेचने और ऐसा करने वाले लोगों के बहिष्कार की अपील की थी. दुर्गापूजा के समय मांस-मछली खाने वालों को पाखंडी कहने से विवाद गर्मा गया था.

क्यों पकड़ा मामले ने तूल?

अब बंगाल में पूजा-पाठ से लेकर खानपान में हर जगह मछली का प्रयोग शुभ माना जाता है.  बंगाली समाज के एक बड़े हिस्से में दुर्गापूजा के दौरान, खासकर नवमी के दिन, मांसाहारी भोजन- मछली और मटन को सामान्य सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है. हालांकि हर परिवार, समुदाय और पूजा समिति की प्रथा अलग हो सकती है. ऐसे में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि बंगाली इस दुर्गा पूजा पर भी वही खाएंगे, जो हमेशा से खाते आए हैं.

सामिक भट्टाचार्य ने कहा, ‘कोई क्या खाता है या क्या पहनता है, यह उसकी अपनी पसंद है. बंगाल का खान-पान का कल्चर बहुत विविध है और हर किसी को अपनी पसंद के हिसाब से चलने की आजादी है. क्या बंगाली मछली या मटन नहीं खाएंगे? स्वामी विवेकानंद ने भी इसे सही माना था. किसी संत, नेता या किसी और को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि आपको क्या खाना चाहिए. निजी पसंद निजी ही रहनी चाहिए.’

दिलीप घोष का बड़ा बयान

घोष ने कहा, हमारे देश में धारणा है सनातन में अहिंसा को सर्वोपरी दिया है, तो इसलिए पूजा पाठ जब होता है उस समय हिंसा नहीं हो और मांस न बेचे. इसीलिए शाकाहारी भोजन होना चाहिए, सात्त्विक भोजन, पूजा-पाठ का वातावरण बनता है. लेकिन बंगाल में माई के भक्त हैं लोग, काली मां को बली चढ़ाई जाती है और कितने देवता है यहा और यहां तो मां दुर्गा को नवमी के दिन बली चढ़ता है और लोग उसको प्रसाद के रूप में लोग लेते हैं. इसीलिए यहां की परंपरा भी दूसरी है, यहां भगवान को प्रसाद के रूप में मछली चढ़ाया जाता है और यह युगों से चला आ रहा है. तो संत लोग अपने तरीके से बोलते हैं. पूजा के समय सात्त्विक भोजन लेना चाहिए और पूजा का वातावरण शुद्ध होना चाहिए इसीलिए जहां पूजा हो रहा है वहा से दूर बेचें.’

महाष्टमी पर शराब पर लगे बैन

सुवेंदु अधिकारी के महाष्टमी के दिन शराब पर पाबंदी को लेकर दिलीप ने कहा, इसी प्रकार जैसे की सात्त्विक भोजन होना चाहिए उसी प्रकार नशा मुक्त भी होना चाहिए, पूजा के समय कोई शराब पियेगा तो कानून व्यवस्था बिगड़ेगी. इतने लोगों को कैसे संभालेगी पुलिस? इसलिए कुछ न कुछ तो रोक होनी चाहिए .

विज्ञापन पर बवाल

इसी तरह राज्य के एक विज्ञापन में मां दुर्गा को पारंपरिक 10 भुजाओं के बजाय 11 भुजाओं (हाथों) के साथ दिखाए जाने पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ तो बीजेपी नेताओं ने माफी मांगी है. दोनों घटनाओं पर बीजेपी सफाई दे रही है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *