देशभर में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती मनाई जा रही है. बापू की स्मृतियां देश के कोने-कोने में आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले के इटारसी में भी महात्मा गांधी की ऐसी ही ऐतिहासिक यादें आज तक सहेजकर रखी गई हैं. इटारसी की जिस धर्मशाला में महात्मा गांधी ने एक रात बिताई थी, वहां आज भी उस कमरे को उसी रूप में सुरक्षित रखा गया है. सेठ लखमीचंद गोठी परिवार ने इस कक्ष को बापू प्रवास स्मृति कक्ष का रूप दिया है. यहां महात्मा गांधी से जुड़ा साहित्य, चरखा, प्रतिमा और दुर्लभ छायाचित्र रखे गए हैं, ताकि आने वाली पीढ़ियां बापू के विचारों और उनकी इटारसी यात्रा से रूबरू हो सकें.
30 नवंबर 1933 को महात्मा गांधी ट्रेन से वर्धा से इटारसी पहुंचे थे. रेलवे स्टेशन के ठीक सामने स्थित गोठी धर्मशाला में उन्होंने एक रात विश्राम किया था. कहा जाता है कि महात्मा गांधी ने धर्मशाला और इटारसी की व्यवस्थाओं की सराहना की थी. धर्मशाला में रखे आगंतुक रजिस्टर में उन्होंने अपने हाथों से कुछ पंक्तियां भी दर्ज की थीं. उस दौर में इस धर्मशाला में समाज के वंचित वर्ग के लोगों को भी ठहरने की सुविधा दी जाती थी. महात्मा गांधी को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने इस व्यवस्था की विशेष रूप से सराहना की.
गोठी धर्मशाला में बिताई थी एक रात
महात्मा गांधी ने धर्मशाला के रजिस्टर में यहां की व्यवस्था को लेकर अपने विचार दर्ज किए थे. उन्होंने स्वच्छता के साथ रहने वाले हरिजनों को भी धर्मशाला में स्थान दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और संचालकों के प्रति आभार जताया था. इटारसी प्रवास के दौरान गांधी जी ने यहां एक सभा को भी संबोधित किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे. आज दशकों बाद भी उस ऐतिहासिक प्रवास की निशानी गोठी धर्मशाला में सुरक्षित है. गांधी जी के हाथों लिखा संदेश आज भी फ्रेम में संजोकर रखा गया है. यही नहीं, जिस कमरे में बापू ने रात गुजारी थी, उसे बापू प्रवास स्मृति कक्ष के रूप में संरक्षित किया गया है. यहां रखा चरखा, महात्मा गांधी की प्रतिमा, साहित्य और तस्वीरें नई पीढ़ी को उस दौर की याद दिलाती हैं.
