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Russia Ukraine War: 4 साल बाद भी क्यों नहीं रुक रहा रूस-यूक्रेन युद्ध? क्यों शांति समझौते को तैयार नहीं हैं दोनों देश

रूस यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन एक बार फिर से बड़े राजनीतिक बदलाव की तरफ बढ़ रहा है. राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की अपने प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद सरकारी फेरबदल का संकेत दिया है. इसी बीच युद्ध के समाप्त होने का कोई भी संकेत नहीं मिल पा रहा है. बार-बार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के बावजूद भी रूस और यूक्रेन अपनी मूल मांगों पर समझौता करने को तैयार नहीं है. इससे शांति समझौता मुश्किल होता जा रहा है.

क्षेत्रीय विवाद सबसे बड़ी बाधा 

युद्ध के सालों तक जारी रहने का एक प्राथमिक कारण कब्जे वाले क्षेत्रों पर असहमति है. रूस जापोरिजिया और खेरसोन के साथ-साथ डोनबास क्षेत्र पर पूरी तरह कंट्रोल बनाए रखने पर जोर देता है. इसी के साथ राष्ट्रपति पुतिन ने बार-बार इन क्षेत्रों को रूस की ऐतिहासिक भूमि का हिस्सा बताया है और उन्हें वापस करने की कोई इच्छा नहीं दिखाई है.

यूक्रेन का यह कहना है कि वह अपने कब्जे वाले किसी भी क्षेत्र पर रूसी कंट्रोल को मानता नहीं देगा. इसी के साथ जेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन किसी भी शांति समझौते को स्वीकार नहीं कर सकता है जो देश के क्षेत्र का लगभग पांचवा हिस्सा रूसी कब्जे में छोड़ देता है.

नाटो सदस्यता एक बड़ा मुद्दा 

सुरक्षा गारंटी बातचीत में एक और बड़ी बाधा बनी हुई है. यूक्रेन का ऐसा कहना है कि भविष्य में किसी भी रूसी आक्रमण को रोकने के लिए नाटो में शामिल होना या फिर पश्चिमी देशों से समकक्ष दीर्घकालिक सैन्य गारंटी प्राप्त करना जरूरी है. दूसरी तरफ रूस यूक्रेन की नाटो सदस्यता को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा मानता है. मॉस्को ने बार-बार अपनी सीमाओं की तरफ नाटो के विस्तार को एक लाल रेखा के रूप में बताया है और जोर देकर यह भी कहा है कि यूक्रेन को गठबंधन से बाहर ही रहना चाहिए.

यूक्रेन के हमले के बाद रूस की स्थिति सख्त 

यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरी, बंदरगाह और ईंधन बुनियादी ढांचे पर ड्रोन हमले जारी रखे हैं. इससे आर्थिक और सैन्य नुकसान हो रहा है. अपनी स्थिति को नरम करने के बजाय क्रेमलिन ने अपनी सैन्य रणनीति को मजबूत करके जवाब दिया है. रूस ने संकेत दिया है कि वह पूर्वी मोर्चे पर अभियान को तेज करने और यूक्रेनी हमले का और भी ताकत से जवाब देने का इरादा रखता है.

बीते कुछ सालों में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों से जुड़ी कई दौर की बातचीत हुई है. इसमें जिनेवा और संयुक्त अरब अमीरात में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आयोजित बातचीत भी शामिल है. हालांकि कथित तौर पर प्रस्तावित शांति ढांचा जिसमें सुरक्षा गारंटी के बदले में क्षेत्रीय समझौते शामिल हैं, दोनों पक्षों को संतुष्ट करने में कामयाब नहीं हो पाए.

 

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