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1 अप्रैल से बदल जाएंगे नियम! पूरा अकाउंट नहीं होगा फ्रीज; RBI की तरफ से जारी हुआ नया नियम

डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते दौर में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामले पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं. अभी यदि आपके खाते में किसी तरह का संदिग्ध ट्रांजेक्शन होता है तो पूरा अकाउंट को ही फ्रीज कर दिया जाता है. लेकिन अब रिजर्व बैंक की तरफ से इस नियम में बदलाव की तैयारी की जा रही है. जी हां, अब यदि आपके बैंक अकाउंट में किसी तरह का संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखाई देता है तो आपको पूरा अकाउंट बंद होने का डर नहीं रहेगा. रिजर्व बैंक (RBI) नया फ्रेमवर्क लेकर आया है, जिससे आम कस्टमर को बड़ी राहत मिलने वाली है.

जी हां, आरबीआई के नए फ्रेमवर्क के अनुसार अब साइबर फ्रॉड या मनी म्यूल अकाउंट के शक में पूरे बैंक अकाउंट को फ्रीज करने के बजाय केवल विवादित रकम पर ही रोक लगाई जाएगी. रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से एक नया ड्राफ्ट जारी किया गया है. इसके तहत 1,000 रुपये या उससे ज्यादा का संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने पर बैंक पूरे अकाउंट को फ्रीज नहीं करेंगे. बैंक अब केवल विवादित राशि पर ही अस्थायी रोक यानी डेबिट होल्ड लगाएंगे. यह सिस्टम KYC निर्देश 2025 में संशोधन करके लागू किया जा रहा है. इसे 1 अप्रैल 2027 से लागू करना जरूरी होगा. हालांकि, बैंकों की तरफ से इसे पहले भी अपनाया जा सकता है.

ग्राहकों का पूरा पैसा बैंक में सिक्योर रहेगा

इसके लिए बैंकों को अपने सिस्टम में एआई (AI) बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा. यदि किसी अकाउंट में अचानक से असामान्य या घोषित इनकम से ज्यादा बड़ा ट्रांजेक्शन होता है या वह अकाउंट किसी साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़ा दिखता है तो एआई (AI) सिस्टम की तरफ से तुरंत अलर्ट जारी किया जाएगा. नया ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त 2026 के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें मनी म्यूल एक्टिविटी और साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए एक एसओपी (SOP) बनाने का निर्देश दिया गया था. इस नियम से ग्राहकों का पूरा पैसा बैंक में सिक्योर रहेगा और वे अपना नॉर्मल ट्रांजेक्शन जारी रख सकेंगे.

डॉक्यूमेंट चेक करने के लिए 10 दिन का समय होगा

संदिग्ध ट्रांजेक्शन के हालात में ग्राहकों को अपनी पहचान, कमाई का जरिया या पैसे का सोर्स साबित करने के लिए 20 दिन का समय दिया जाएगा. बैंक के पास कस्टमर के डॉक्यूमेंट चेक करने के लिए 10 दिन का समय होगा. अगर जवाब सही पाया गया तो पैसे पर लगी रोक को तुरंत हटा लिया जाएगा. यदि कस्टमर ने 20 दिन में किसी तरह का जवाब नहीं दिया या उसका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा तो बैंक मामले को NCRP / CFCFRMS पोर्टल के जरिये पुलिस को सौंप देगा. इसके बाद पुलिस के पास आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए 30 दिन का समय होगा.

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