बांग्लादेश की जेल में बंद हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की मां का पिछले दिनों निधन हो गया. अपनी मां से मिलने की उनकी आखिरी ख्वाहिश भी अधूरी रह गई. हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास की मां की निधन के बाद उन्हें केवल 5 घंटो की पैरोल मिली. दास की ओर से पिछले 9 सितंबर को ही पैरोल के लिए आवेदन किया गया था, वह अपनी मां से मिलने जाना चाहते थे.
बेटे की जेल से चिंतित थी संध्या देवी
परिवार का कहना है कि संध्या रानी अपने बेटे की जेल में रहने के कारण चिंतित थीं. दास को बार-बार कोशिशों के बावजूद भी जमानत नहीं मिल रही थी. इसी बीच उनकी तबीयत खराब हो गई. इसी हफ्ते मंगलवार को उन्होंने श्री श्री पुंडरीक धाम आश्रम में जाने की बात कही. बताया जाता है कि चिन्मय कृष्ण दास भी इसी आश्रम में रहा करते थे.
परिवार ने मांगी थी अनुमति
संध्या रानी की खराब तबीयत के कारण चिन्मय दास अपनी मां से मिलना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने अनुमति मांगी थी. गुरुवार को दास के बड़े भाई रंजन कुमार धर ने पैरोल के लिए आवेदन किया था. हैरान करने वाली बात है कि प्रशासन ने इसको खारिज कर दिया. गुरुवार को चिन्मय दास की मां का निधन हो गया, जिसके बाद परिवर ने फिर से पैरोल के लिए आवेदन किया. हालांकि, इस बार प्रशासन ने केवल 5 घंटे का पैरोल दिया.
पांच घंटे के लिए बाहर आए दास
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 2.30 बजे उन्हें जेल से बाहर लाया गया, जिससे वह अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सके. एक स्थानीय अधिकारी की ओर से बताया गया कि चिन्मय कृष्ण दास के भाई की ओर से मां के निधन के बाद आवेदन दिया गया था. कानून के अनुसार, उन्हें पांच घंटे की पैरोल दी गई.
गौरतलब है कि चिन्मय कृष्ण दास को नवंबर 2024 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका से गिरफ्तार किया गया था. सम्मिलित सनातनी जागरण जोत के प्रवक्ता चिन्मय कृष्ण दास पर हत्या का मामला दर्ज है.
