कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार के निधन पर सियासी बवाल शुरू हो गया है. कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इसे पार्टी के लिए अपूरणीय क्षति बताया है और कांग्रेस प्रवक्ता उदित राज ने भी पार्टी के लिए बड़ी क्षति करारा दिया है. इसे बीजेपी ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों पीड़ितों के परिवार का अपमान बताया है.
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शुक्रवार (21 अगस्त) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस ने 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताया है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस हमारे सिख समुदाय के हत्यारों की तारीफ कैसे कर सकती है.
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए प्रदीप भंडारी ने आगे कहा कि ये राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान वाली असली सोच है और इससे सिख समुदाय के प्रति कांग्रेस की नफरत साफ जाहिर होती है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को 1984 के सिख-विरोधी दंगों के हजारों पीड़ितों का अपमान करने और पीड़ितों के परिवारों व बचे हुए लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने के लिए माफी मांगनी चाहिए.
दीपेंद्र हुड्डा के बयान से बवाल
कांग्रेस सांसद और हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता दीपेंद्र हुड्डा ने सज्जन कुमार के निधन पर न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा, “आज देश के राजनीतिक क्षितिज पर एक अपूरणीय क्षति हुई है.” हुड्डा ने आगे कहा कि उन्हें (सज्जन कुमार) को देशभर में एक आदर्श के तौर पर देखा जाता है.
हुड्डा के बयान से भड़के आरपी सिंह
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि कांग्रेस के लिए एक हत्यारा रोल मॉडल हो सकता है. उन्होंने कहा कि उस पार्टी से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसके अपने प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने दिल्ली में लगभग 3,000 बेगुनाह सिखों की हत्या को सही ठहराते हुए कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती थोड़ी हिलती है.
आरपी सिंह ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बेटों, पतियों, पिताओं और भाइयों को खो दिया जिनमें से कई को जिंदा जला दिया गया था उनके लिए यह धरती का थोड़ा हिलना नहीं था. यह उनकी पूरी जिंदगी की बर्बादी थी. आज जब कांग्रेस नेता 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार के दोषी सज्जन कुमार को रोल मॉडल बताते हैं, तो वे साफ तौर पर दिखाते हैं कि कांग्रेस 1984 को कैसे याद करती है.
‘1984 के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रही कांग्रेस’
बीजेपी नेता ने साफ किया कि सिख कभी 1984 को नहीं भूलेंगे. दिल्ली में लगभग 3,000 बेगुनाह सिख मारे गए थे. उनके खून और उनके परिवारों के दर्द को राजनीतिक श्रद्धांजलि से नहीं मिटाया जा सकता. उन्होंने आगे कहा कि हत्याओं के दोषियों पर शोक मनाकर और उन्हें महिमामंडित करके कांग्रेस किसी विरासत का सम्मान नहीं कर रही है, बल्कि 1984 के पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रही है.
