राजनीति
US में 15 साल नौकरी करने के बाद लौटा ये नेतापुत्र और बदल दी पश्चिमी UP की सियासत!
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- July 05, 2016
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(यूपी में विधानसभा चुनाव में अब बस कुछ ही महीने बचे हैं। इससे पहले आईबीएनखबर.कॉम आपको बता रहा है उन सियासी धुरंधरों का सफर, जो राज्य की राजनीति की दशा और दिशा तय करते हैं। इस बार पढ़िए राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह के बारे में।)
जाट नेता चौधरी अजित सिंह राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के संस्थापक हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुई थी। दिसंबर 2011 से मई 2014 तक वे देश के नागरिक उड्डयन मंत्री रहे। वे सात बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। केंद्रीय उद्योग मंत्री और केंद्रीय खाद्य मंत्री रह चुके हैं। अजित सिंह का जन्म 12 फरवरी 1939 यूपी के मेरठ के भडोला गांव (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। वे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के पुत्र हैं। उनकी माता का नाम गायत्री देवी है। लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी और आईआईटी खड़गपुर से बीटेक करने के बाद शिकागो के इलिनोइस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से उन्होंने अपनी मास्टर डिग्री पूरी की। भारत आने से पहले तकरीबन 15 साल तक उन्होंने अमेरिका में मल्टीनेशनल कंपनियों में काम किया।
US में 15 साल नौकरी करने के बाद लौटा ये नेतापुत्र और बदल दी पश्चिमी UP की सियासत!जाट नेता चौधरी अजित सिंह राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के संस्थापक हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा राज्यसभा सदस्य के रूप में शुरू हुई थी।
अजित सिंह की शादी 17 जून 1967 में राधिका सिंह के साथ हुई। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। उनके पुत्र जयंत चौधरी मथुरा से सांसद रह चुके हैं और आरएलडी के महासचिव हैं। 1986 में पहली बार राज्यसभा सांसद चुने गए अजित ने तीन साल बाद ही अपने पिता चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल से अलग होकर नई पार्टी बना ली लोक दल (अजित)। इसी का नाम बाद में बदलकर उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) कर दिया।
1988 में लोकदल (अजित) का जनता पार्टी में विलय कर दिया गया और अजित सिंह इसके अध्यक्ष बन गए। बाद में जनता पार्टी जनता दल में मर्ज हो गई और सिंह को महासचिव बनाया गया। 1989 में वी पी सिंह की सरकार में अजित सिंह को उद्योग मंत्री बनाया गया। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हो गए और नरसिंह राव सरकार में उन्हें खाद्य मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल का गठन किया। 2001 में वाजपेयी सरकार में वे कृषि मंत्री बनाए गए। दिसंबर 2011 में वे यूपीए में आए और अब मनमोहन सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्री बने। वे बागपत से सात बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं जबकि एक बार राज्यसभा सांसद चुने गए हैं।
एक समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अजित सिंह की तूती बोलती थी। वे जाटों, किसानों के चहेते थे। वे पार्टियां बदलते रहे लेकिन उन्हें मिलने वाले वोटों में कमी नहीं आई। हालांकि उनकी राजनीतिक अवसरवादिता के चलते लिए गए फैसलों ने उनकी पार्टी को खासा नुकसान पहुंचाया है। एक समय उनके पिता चरण सिंह का यूपी की तकरीबन 150 सीटों पर एकछत्र राज था लेकिन आज अजित की पार्टी का लोकसभा में कोई सदस्य नहीं हैं जबकि यूपी विधानसभा में भी आरएलडी के महज 9 विधायक हैं।
दरअसल अजित सिंह की एक बड़ी ताकत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट-मुस्लिम समीकरण रहे हैं लेकिन मुजफ्फरनगर दंगों के बाद ये दोनों समुदाय दो ध्रुवों में बंट गए। आगामी चुनाव के लिए अजित कांग्रेस, बीजेपी और सपा तीनों में से किसी के साथ भी गठबंधन कर सकते हैं। तीनों ही दल उनकी ताकत से भलीभांति वाकिफ हैं लेकिन उनसे मिले राजनीतिक धोखे की वजह से उनपर भरोसा करने में हिचक भी रहे हैं।