अपराध समाचार
72 घंटे बाद कर्फ्यू में छूट, मिला पेट्रोल बम और तलवारों का जखीरा
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- May 16, 2017
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राजस्थान के बांसवाड़ा शहर में हुए उपद्रव और आगजनी की घटना के चौथे दिन सोमवार को पुलिस और प्रशासन ने बड़ा खुलासा किया। कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट भगवतीप्रसाद ने कहा कि पूरा घटनाक्रम पूरी तरह से सुनियोजित था और पहले पुलिस बल कम था, जबकि उपद्रवी पूरी तैयारी के साथ आए थे। कम पुलिस फोर्स के बावजूद हालात पर काबू पाया, लेकिन दूसरे दिन जो हुआ, वह इस बात को दर्शाता है कि घटना दोनों पक्षों की ओर से तयशुदा थी। इसमें नुकसान बड़ा हो सकता था, लेकिन इंटरनेट सेवाएं बंद करने और समय पर कर्फ्यू लगाने से हालात पर काबू पा लिए गए।
कलेक्टर भगवती प्रसाद और पुलिस अधीक्षक कालूराम रावत ने सोमवार शाम कलेक्ट्रेट में संयुक्त प्रेस काॅन्फ्रेंस की। कलेक्टर ने कहा 11 मार्च को हुई उपद्रव की घटना के बाद 16 ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए। तब से लेकर अब तक 82 मकान-दुकानें-लारियां आगजनी के शिकार हुए। 35 पोल पर स्ट्रीट लाइटें, कई स्थानों पर नल और 31 मीटर पाइप लाइन तोड़ी गईं अौर 5 स्थानों पर बिजली के तार काट दिए गए।
इन घटनाओं से पीड़ित लोगों के लिए जिला प्रशासन ने आवश्यक सामग्री दूध, दवाई, सब्जी की सप्लाई घटना के बाद से ही प्रारंभ करवा दी थी। वागड़ सेवा संस्था के माध्यम 650 फूड पैकेट बांटे गए। नुकसान के आकलन के लिए तहसीलदार, नगर परिषद आयुक्त, पटवारी के साथ 12 अधिकारियों का दल लगाया और व्यवस्था के लिए 35 पटवारियों को नियुक्त किया।
प्रभावित लोगों को उनके घर पर ले जाकर उनसे जानकारी ली गई कि वास्तविक नुकसान का आकलन और पुनर्वास के लिए काम किया जा रहा है। प्रशासन ने दावा किया कि व्यवसाय प्रारंभ करवाने के लिए जिला उद्योग केंद्र और अल्पसंख्यक मामलात विभाग की ओर से लोन दिलवाए जाएंगे। ।
घटना अप्रत्याशित और तनावपूर्ण थी-एसपी
एसपी कालूराम रावत ने कहा कि 11 मई की रात हुई घटना अप्रत्याशित और तनावपूर्ण थी। जिन दिन मैंने ज्वॉइन किया था, दिन तो अच्छा रहा, लेकिन रात ठीक नहीं रही। उन्होंने बताया कि कालिका माता मंदिर के पास पहाड़ी पर शिव मंदिर है। इस मामले में 1990 में एफआईआर कोतवाली में दर्ज हुई थी और क्रॉस केस भी दर्ज हुए थे। बाद में कोर्ट में चालान पेश हुए और प्रकरण निस्तारित हो चुके हैं।
अप्रैल 017 में इसी मंदिर क्षेत्र का विवाद जिला अधिकारियों के सामने एक बैठक में आया था, जिस पर प्रशासन ने दोनों पक्षों को समझाया था। 11 मई को शब ए बरात के मद्देनजर पुलिस बल लगा था। रात 10 बजे कालिका माता मंदिर के पीछे पत्थरबाजी होती है, जिसमें घायल महेंद्रसिंह को अस्पताल ले जाया जाता है। इसकी सूचना कलेक्ट्री के कर्मचारियों से मिलती है।
इसी बीच बाजार में एक युवक पर कुछ युवकों द्वारा चाकू से हमला करने की एफआईआर दर्ज होती है। तब कलेक्टर-एसपी पहुंचे। घटना की सूचना आईजी और आयुक्त को दी। साथ ही हालात पर नियंत्रण किया। इस दौरान उपद्रवियों ने बिजली के तार काट दिए, जिससे वहां अंधेरा रहा। तब पुलिस बल त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में तैनात था। रात में धारा 144 लागू कर दी गई।
दूसरे दिन सुबह कुछ संभ्रांत लोगों ने हमें कालिका माता मंदिर क्षेत्र में बातचीत और ज्ञापन देने की सूचना दी। हमने लोगों की बात सुनी और सहमत भी हुए। उसके बावजूद वहां एकत्र लोगों में कई बाहर निकलकर अन्य बस्तियों की ओर गए। उन्हें समझाया, लेकिन वे नहीं माने। हमने बच्चों महिलाओं को सुरक्षित जगह पहुंचाया और लोगों से कहा कि वे घरों से बाहर नहीं आएं। घटना के बाद हालात पर काबू पाया। सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें धारदार हथियार और 47 पेट्रोल बम, खाली बोतलें मिलीं। 7 प्रकरण दर्ज किए हैं और भी केस दर्ज किए जा रहे हैं। पुरानी बोतलें मिलने पर कबाडिय़ों से भी कड़ी पूछताछ की जा रही है। 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
47 पेट्रोल बम जब्त, बड़ा नुकसान रोका
एसपी रावत ने खुलासा किया कि कुछ उपद्रवियों के पास पेट्रोल बम थे। ऐसे लोगों को चिन्हित कर 47 पेट्रोल बम जब्त किए गए। कबाडिय़ों से पुलिस पूछताछ कर रही है कि यह पेट्रोल बम कहां से आए और किसने किसको दिए। अब तक पुलिस व प्रशासन ने जो रिपोर्ट तैयार की उसमें यह बताया गया है कि इस घटना में 82 मकान, दुकान, ठेले जले।
खुफिया तंत्र के पास पूरा लवाजमा, फिर भी बेपरवाह
शहर में 3-4 दिन से तनाव झेल रहे गणमान्य नागरिकों ने पुलिस और प्रशासन के खुफिया तंत्र की बेपरवाही पर सवाल उठाए हैं। कहा कि खुफिया तंत्र के पास पूरा लवाजमा था, मुखबिर थे। फिर भी उपद्रव से पहले उनका लवाजमा फेल रहा। शहर में होने वाली प्रत्येक गतिविधि को लेकर गोपनीय शाखा और सीआईडी के आला अधिकारी तक रिपोर्ट भेजते हैं। बावजूद शहर में उपद्रव हुआ।
सोमवार को प्रेसवार्ता में कलेक्टर व एसपी ने बताया कि उपद्रव की तैयारी पहले से ही थी। अब सवाल यह है कि यदि खुफिया तंत्र ने अपनी रिपोर्ट भेजी थी तो उस पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इसमें रही लापरवाही जांच का विषय है। पुलिस की गोपनीय शाखा ने दावा किया है कि इस घटना के पीछे शरारती तत्वों को समय पर पाबंद नहीं करना
भी वजह रहा है।
पेट्रोल बम बनाने के लिए कबाड़ी ने दी थी कोल्डड्रिंक की खाली बोतलें
पुराने शहर के कालिका माता-खांटवाड़ा मोहल्लों में उपद्रवियों ने आगजनी के लिए पेट्रोल बमों का इस्तेमाल किया था। इसके लिए उन्होंने कबाड़ियों से बड़ी संख्या में कोल्डड्रिंक की खाली बोतलें जमा की। लेकिन, इतनी बड़ी मात्रा में पेट्रोल कहां से आया, यह अभी तक पुलिस भी स्पष्ट नहीं कर पाई है।
जिस हिसाब से पेट्रोल बम बरामद हुए हैं, जिससे यह अंदेशा है कि पेट्रोल कहीं से लाया गया था। ऐसे में अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि उपद्रवी पहले से ही पेट्रोल लाकर जमा कर रखा था या फिर किसी पेट्रोल पंप से खरीदा गया।
सूत्रों के अनुसार उपद्रवियों को बोतलें सप्लाई करने से खफा होकर दूसरे पक्ष के युवकों ने डूंगरपुर रोड स्थित एक कबाड़ी पर शक के आधार पर ही दुकान में आग लगा दी थी। पेट्रोल बम इस्तेमाल से हुए उपद्रव में प्रशिक्षित बदमाशों के शामिल होने का भी अंदेशा है।
अफवाह से बढ़ा तनाव
उपद्रव बढ़ने के लिए उपद्रवियों ने सोशल साइट्स का भी गलत इस्तेमाल किया। कलेक्टर भगवतीप्रसाद ने बताया कि तनाव के दौरान ही कुछ उत्पाती युवकों ने वॉट्सएप पर किसी दूसरे मृतकों के पिक अपलोड कर मामले का तूल दिया। जिससे अफवाहें बढ़ती गई और तनाव बढ़ गया। यहीं वजह है कि कर्फ्यू लगाते ही पुलिस प्रशासन को इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगानी पड़ी।
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