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संसद सत्र: सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार, लेकिन कोर्ट वाले मुद्दों पर नहीं
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- April 25, 2016
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संसद सत्र: सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा को तैयार, लेकिन कोर्ट वाले मुद्दों पर नहीं
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है जिसके हंगामेदार होने की संभावना है. उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का लागू करना और सूखे को लेकर विपक्षी दलों का सरकार को घेरना तय है. हालांकि सरकार भी इससे निपटने की पूरी तैयारी में है.
वास्तव में यह बजट सत्र का दूसरा चरण है लेकिन 16 मार्च को पहले चरण के समाप्त होने के बाद दोनों सदनों का सत्रावसान कर दिया गया था. इसलिए यह नया सत्र होगा. सरकार ने सत्र के लिए भारी एजेंडा तय किया है जिसमें लोकसभा में 13 विधेयक और राज्यसभा में 11 विधेयक पारित कराना शामिल है.
सरकार के प्रतिनिधियों में इस बात को लेकर आम सहमति है कि शुरूआती कुछ दिन में जीएसटी जैसे विवादित मुद्दों को आगे बढाना संभव नहीं होगा.
वामदल, जदयू और अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से कांग्रेस उत्तराखंड और अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने को लेकर केन्द्र को घेरने के लिए प्रतिबद्ध हैं. कांग्रेस सरकारों या इसके या अन्य विपक्षी दलों के समर्थन की सरकारों के केन्द्र में सत्ता में होने पर राष्ट्रपति शासन लागू करने की घटनाओं का एनडीए सरकार द्वारा हवाला देते हुए इस हमले का जवाब देने की संभावना है.
लोकसभा अध्यक्ष ने संसद की सुचारू कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई. यह सत्र ऐसे समय शुरू हो रहा है जब उत्तराखंड राजनीतिक संकट को लेकर विवाद पैदा हो गया है और दस राज्यों में सूखे जैसी स्थितियां हैं. कई विपक्षी दलों ने उत्तराखंड मुद्दे पर सत्र के पहले दिन प्रश्नकाल को निलंबित करने के लिए नोटिस दिया है और पहले सप्ताह में सूखे पर चर्चा की मांग की है.
राज्यसभा में कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने ऊपरी सदन द्वारा एक प्रस्ताव का अनुरोध किया जिसमें उत्तराखंड में लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित सरकार को अस्थिर करने पर दुख प्रकट किया जाए और राज्य में अनुचित तरीके के राष्ट्रपति शासन को नामंजूर किया जाए.
उत्तराखंड मुद्दे के अलावा, कांग्रेस अरूणाचल प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने, पठानकोट आतंकी हमले, इशरत जहां मामले, सूखा प्रबंधन एवं शिक्षण संस्थानों के कथित सांप्रदायीकरण के मुद्दों पर सरकार को निशाना बनाएगी. पिछले साल दो सत्र लगभग पूरी तरह से धुल जाने के बाद सरकार बजट सत्र के दूसरे चरण में जीएसटी विधेयक सहित अन्य विधेयकों को पारित करने का प्रयास करेगी.
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