राज्यसभा में स्वामी ने पढ़ा एक ऐसा खत जिस पर जमकर मचा बवंडर!
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- May 04, 2016
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अगस्ता वेस्टलैंड मामले पर राज्यसभा में इस समय जमकर बहस चल रही है। सुब्रमण्यम स्वामी ने राज्य सभा में मिशेल का खत पढ़ा, जिसके बाद जमकर हंगामा हो रहा है। खत में स्वामी ने साफ-साफ सोनिया गांधी का नाम पढ़ा। इसके बाद कांग्रेसी सांसद और आक्रामक हो गए। कांग्रेस ने उनके बयान की प्रामाणिकता साबित करने को कहा। सभापति ने स्वामी से पूछा कि क्या आप इसकी प्रामाणिकता साबित करेंगे, तो स्वामी ने कहा कि मैं इसे साबित कर दूंगा।
इससे पहले स्वामी ने कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और अहमद पटेल पर हमला किया। सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि इटली कोर्ट के जजमेंट में अफसर, राजनेता और एयरफोर्स के अधिकारियों के नाम शामिल हैं। स्वामी ने साफ कहा कि खत में सोनिया गांधी का नाम लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम आए हैं, उनसे पूछताछ होनी चाहिए। स्वामी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम लिए बिना कहा कि कई कांग्रेसी नेताओं के मिशेल के पिता से संबंध हैं। स्वामी ने कहा कि 6 गुना ज्यादा दाम पर डील की गई। इसकी अनुमति तत्कालीन रक्षामंत्री एके एंटनी ने दी थी।
राज्यसभा में स्वामी ने पढ़ा एक ऐसा खत जिस पर जमकर मचा बवंडर!
अगस्ता वेस्टलैंड मामले पर राज्यसभा में इस समय जमकर बहस चल रही है। सुब्रमण्यम स्वामी ने राज्य सभा में मिशेल का खत पढ़ा, जिसके बाद जमकर हंगामा हो रहा है।
स्वामी ने ये भी आरोप लगाया कि मीडिया को मैनेज करने के लिए पैसे दिए गए। उन्होंने कहा कि मिशेल ने भारत में मीडिया को मैनेज करने के लिए 6 मिलियन यूरो पैसा दिया था। सरकार को ये पैसा लेने वाले जर्नलिस्टों की जांच करानी चाहिए। ये हमारे समाज में कैंसर की तरह हैं।
कोर्ट ने जिसे ड्राइविंग फोर्स बताया है, उससे पूछताछ होनी चाहिए। स्वामी ने अहमद पटेल का नाम लिए बिना उन पर भी हमला किया। स्वामी के कहा कि AP कौन है, इसका पता लगाया जाए। स्वामी के आरोपों पर कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने जवाब दिया है। आनंद शर्मा ने कहा कि सदन में प्रामाणिक तथ्य पेश किए जाएं। सदन के नियमों को तोड़ा जा रहा है। आनंद शर्मा ने कहा कि हमारे खिलाफ झूठा प्रचार कर हमें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
सौदे में सिंगल वेंडर की बात गलत है। हेलिकॉप्टर के सौदे में शुरुआत में 4 कंपनियां थीं। 2003 में 4 कंपनियों ने प्रस्ताव दिये थे। दूसरे हेलिकॉप्टर से टेस्टिंग की बात गलत है। ये पूरे वायुसेना को कलंकित करने वाली बात है। VVIP 4500 मीटर से ऊंचा नहीं उड़ते हैं। ऐसे में उड़ान की ऊंचाई 6000 मीटर क्यों की गई। ट्रायल के दौरान एसपीजी भी शामिल थी। NDA शासन काल में ट्रायल बाहर कराने का फैसला लिया गया। ब्रिटेन और अमेरिका में भी जरूरी टेस्ट किये गए थे। हमारी सरकार ने इटली में मुकदमा किया था। मिलान कोर्ट ने करार को रद्द किया था। डील की रकम घटती-बढ़ती नहीं है। सारे आरोप झूठे हैं। बिचौलिए का नाम लेने पर कोई दोषी नहीं होता।
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