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मूवी रिव्यू: ‘डियर ज़िंदगी’
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- November 25, 2016
- By sochindia
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एक्टर: आलिया भट्ट, शाहरूख खान, इरा दूबे, कुनाल कपूर, अली जफर, अंगद बेदी, आदित्य रॉय कपूर
डायरेक्टर: गौरी शिंदे
रेटिंग: 2.5 स्टार
‘हम कभी-कभी सफलता पाने के लिए आसान रास्तों की जगह मुश्किल रास्तों को चुनते हैं. लेकिन ये ज़रूरी नहीं होता है कि हर बार मुश्किल रास्ता ही आपको मंजिल तक ले जाए. कभी ऐसा भी होता है कि आसान रास्ते भी हमें मंज़िल तक पहुंचा देते हैं.’ इसी लाइन के साथ दिमाग के डॉक्टर जहांगीर खान उर्फ जग (शाहरूख खान) रिलेशनशिप, करियर और परिवार को लेकर हर तरफ से कन्फ्यूज्ड कायरा (आलिया भट्ट) की उलझने सुलझाते हैं. इसे सुनकर सिर्फ कायरा की नहीं देखने वालों की भी कुछ हद तक उलझन सुलझ जाती है.
कहानी
फिल्म के फर्स्ट हाफ में दिखाया गया है कि कैसे एक कैमरावुमेन कायरा कम उम्र में ही जिंदगी में बहुत कुछ कर गुजरना चाहती है लेकिन अपने टैलेंट के दम पर ना कि हॉटनेस दिखाकर. लेकिन सबकी तरह उसकी लाइफ में भी ऐसा प्वाइंड आता है जब वो हर बात को लेकर कन्फ्यूज्ड है. वो अपनी फैमिली से दूर रहना चाहती है. किसी लड़के के साथ ज्यादा समय तक उसका रिलेशनशिप टिक नहीं पाता. उसे लगता है कि सिंगल होना भी अपराध है क्योंकि इस वजह से उसे घर खाली करने के लिए कहा जाता है. कायरा के कैरेक्टर से आज यंग जेनेरेशन पूरी तरह कनेक्ट करेगी. क्योंकि इस फिल्म में घर-परिवार, दोस्त, रिलेशनशिप, झगड़ा, ब्रेकअप सब कुछ को एक-एक करके दिखाया है और इसमें से किसी ना किसी दौर से तो आप भी जरूर गुजरे होंगे.
कायरा की हरकतों को देखकर आप उसे जज कर सकते हैं. लेकिन फिल्म के सेकेंड हाफ में जब शाहरूख खान की एंट्री होती है और वो कायरा की सभी उलझनों और परेशानियों को एक-एक कर समझाते हैं तो लगता है कि हम दूसरों की हर बात को इतनी जल्दी क्यों जज कर लेते हैं और अपनी राय बना लेते हैं.
एक बहुत ही बड़ी बात शाहरूख फिल्म में एंट्री के सीन में ही कह जाते हैं. हमारी सोच ऐसी बन गई है कि अगर किसी की किडनी फेल हो जाए तो हम सभी को बताते हैं लेकिन किसी को मानसिक रूप से कुछ परेशानी होतो हम खुसुर-फुसुर करते हैं. जबकि ये सबसे गंभीर बीमारी है और इसका इलाज भी आसानी से संभव है लेकिन हम कतराते हैं. दूसरे क्या कहेंगे इस बारे में ज्यादा सोचते हैं. कायरा के कैरेक्टर के जरिए डायरेक्टर बहुत आसानी से आपको यह समझाने में कामयाब होती है कि हमें इससे कतराना नहीं चाहिए.
एक जगह कायरा को समझाते हुए शाहरूख कहते हैं, ‘बचपन में जब रोना आता है तो बड़े कहते हैं आंसू पोछो… जब गुस्सा आता है तो बड़े कहते हैं जस्ट स्माइल, ताकि घर की शांति बनी रहे. नफरत करना चाहते हैं तो इजाज़त नहीं दी और जब हम प्यार करना चाहते हैं तो पता चलता है कि सारा इमोशनल सिस्टम ही गड़बड़ा गया है. काम नहीं कर रहा है. रोना, गुस्सा, नफरत कुछ भी खुलकर जताने नहीं करने दिया. अब प्यार कैसे जताएं?’ ये सिर्फ डायलॉग नहीं है बल्कि वो हकीकत है जिससे हम और आप हर रोज गुज़र रहे हैं. ये देखने के बाद आपको महसूस होगा कि हमने छोटी-छोटी चीजों को कितना कॉम्पलिकेटेड बना दिया है.
फिल्म में कुर्सी की भी एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है जो आपको जरूर जाननी चाहिए. लेकिन ये कहानी आप फिल्म देखकर ही जानिए तो बेहतर होगा. क्योंकि जो मज़ा शाहरूख को देखने में है वो पढ़ने में नहीं. रोमांटिक रिलेशनशिप इतना इरिटेटिंग क्यों होता है? इस सवाल का जवाब भी शाहरूख खान इतनी गहराई से देते हैं कि कायरा के साथ-साथ आप भी सोचने लगते हैं.
इस फिल्म में शाहरूख का लुक और उनका कैरेक्टर देखकर आपको ‘चक दे इंडिया’ की याद आ जाएगी. ज़िदगी को लेकर इतने भारी-भरकम डायलॉग अपनी मंझी हुई एक्टिंग से वो इतनी आसानी से बोल जाते हैं कि आपको समझने के लिए एफर्ट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती.
म्यूजिक
इस फिल्म की बता हो और म्यूजिक का जिक्र ना हो तो बेमानी होगी. म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने दिया है. इस फिल्म में कुल 6 गाने हैं जिसमें एक गाना ‘तु ही है’ जिसे अरिजीत सिंह ने अपनी आवाज दी है और ये गाना आलिया और अली जफर पर फिल्माया गया है. ये गाना बहुत ही खूबसूरत है. इसके अलावा ‘लव यू ज़िदगी’, ‘जस्ट गो टु हेल दिल’ और ‘लेट्स ब्रेकअप’ पहले ही काफी पॉपुलर हो चुका है.
कमी
फिल्म में एक डायलॉग है ‘Genius is about knowing when to stop….’ काश, इस लाइन को लेकर अगर डायरेक्टर गौरी शिंदे थोड़ा अमल कर पाती तो ये फिल्म इतनी लंबी नहीं होती. एक समय के बाद लगता है कि फिल्म को जबरदस्ती खींचा जा रहा है जिसे थोड़ा कम किया जा सकता था.
इससे पहले गौरी शिंदे फिल्म ‘इंग्लिश-विग्लिश’ को डायरेक्ट कर चुकी है और इसके लिए उन्हें बहुत तारीफें मिली हैं. ‘डियर ज़िंदगी’ भी खींची हुई फिल्म जरूर है लेकिन गौरी जो दिखाना चाहती हैं वो कह जाती हैं.
अभिनय
आलिया भट्ट इससे पहले उड़ता पंजाब और हाइवे में अपनी एक्टिंग का दम दिखा चुकी हैं. इस फिल्म में भी उन्होंने हर सीन में जान डाल दी है. शाहरूख खान की मौजूदगी के बावजूद इस फिल्म की लीड एक्टर आलिया ही हैं. इसके लिए डायरेक्टर की तारीफ करनी होगी कि इसे बैलेंस करने में वो कामयाब रही हैं.
हाल ही में शाहरूख खान ने कहा था कि वो फिल्में नहीं लोग चुनते हैं और इस फिल्म को देखकर लगता है कि उन्होंने गौरी शिंदे को चुना है और ये उनका सही निर्णय है. इस रोल को देखने के बाद शाहरूख जैसे सुपरस्टार को लीक से हटकर फिल्मों के बारे में सोचना चाहिए. शाहरूख खान रोमांस किंग तो हैं ही और फैंस उनको कुछ अलग भूमिकाएं करते भी देखना चाहते हैं.
इस फिल्म में कुनाल कपूर, अली जफर और अंगद बेदी का रोल बहुत छोटा है लेकिन इनकी बेहतरीन एक्टिंग की वजह से आप उन्हें भूल नहीं पाएंगे.
क्यों देखें
इस फिल्म को देखने के लिए आपको थोड़े धैर्य की जरूरत पड़ेगी. अगर नहीं है तो आप नोटबंदी के इस दौर में अपने पैसे बचाइए. लेकिन अगर आप आलिया की बेहतरीन एक्टिंग देखना चाहते हैं और शाहरूख खान के फैन हैं तो ये फिल्म आपको एक बार जरूर देखनी चाहिए.
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