खेल
भारत-पाक की ये यादगार भिड़ंत, जब थम गई थीं हर फैन्स की सांस
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- June 04, 2017
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इंग्लैंड में जारी चैंपियंस ट्रॉफी में आज भारत और पाकिस्तान के बीच महामुकाबला होने जा रहा है. ये दोनों चिर प्रतिद्वंद्वी टीम जब भी एक दूसरे से भिड़ती हैं, तब खिलाड़ियों के साथ टीम के समर्थकों की भी धड़कने तेज हो जाती हैं. इतिहास भी इस बात का गवाह रहा कि जब भी दोनों टीमों के बीच मैच हुआ है, दोनों टीमों के खिलाड़ियों के लिए यह करो या मरो जैसा ही रहा. इन दोनों टीमों के खिलाड़ियों के साथ समर्थकों को भी किसी भी कीमत पर हार मंजूर नहीं होती. ऐसे में आज भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहे महामुकाबले के बीच ऐसे ही पांच यादगार मैचों के बारे में आपको बता रहे हैं, जिसने लोगों की धड़कने बढ़ा दी थी…
साल 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल
टी-20 क्रिकेट की बढ़की लोकप्रियता के बीच साल 2007 में पहली बार टी-20 वर्ल्ड कप का आयोजन किया गया और इसके फाइनल मुकाबले में भिड़ंत थी दो चिर प्रतिद्वंद्वियों भारत और पाकिस्तान के बीच… यहां पैवेलियन जहां दर्शकों से अटा पड़ा था, जो सड़क खाली हो रखी थी, सारे लोग मैच देखने टीवी से चिपके हुए थे.
इस मैच में भारतीय टीम में 20 ओवर में 157 रन बनाए थे. टी-20 क्रिकेट के लिहाज से यह स्कोर कम ही माना जा रहा था, लेकिन टीम इंडिया ने लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम के दो विकेट जल्दी झटक कर टीम को दवाब में ला दिया. एक वक्त पाकिस्तानी टीम के 77 रन पर 6 विकेट गिर गए थे और भारतीय खेमे में ख़ुशी साफ देखी जा सकती थी.
हालांकि पाक टीम के कप्तान मिस्बाह उल हक फिर टिक गए और बेहतरीन बल्लेबाज़ी करते हुए टीम को जीत के करीब ला दिया. अब उसे मैच जीतने के लिए आखिरी ओवर में 13 रनों की जरूरत रह गई. यह लक्ष्य बड़ा तो था, लेकिन मुश्किल नहीं.
ऐसे में कप्तान धोनी ने सबको चौंकाते हुए बॉलिंग जोगिंदर शर्मा को थमा दी. इस ओवर में जब मिस्बाह ने छक्का जड़कर जीत का अंतर मात्र 6 रन कर दिया, तो सभी भारतीय फैंस धोनी को इस फैसले के लिए कोसने लगे. हालांकि अगली ही गेंद पर मिस्बाह ने स्कूप करने के चक्कर में श्रीशांत को सीधा कैच थमा दिया और इस तरह भारत ने 5 रन से इस मैच को अपने नाम करते हुए टी-20 क्रिकेट का पहला विश्व विजेता बन गया.
इंडिपेंडेंस कप का फाइनल मैच
साल 1997 में सिल्वर जुबिली इंडिपेंडेंस कप के खिताबी मुकाबले में भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने थीं. ढाका में खेले जा रहे बेस्ट ऑफ़ थ्री फाइनल के तीसरे मुकाबले में टीम इंडिया के कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला था. यहां भारतीय गेंदबाजों ने कप्तान के फैसले को सही ठहराते हुए पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज़ आमिर सुहैल और शाहिद आफरीदी को जल्द ही पैवेलियन भेज दिया. हालांकि मिडिल ऑडर में एजाज अहमद और सईद अनवर की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत पाकिस्तान ने 5 विकेट गवांकर 314 रन का स्कोर खड़ा.
इस विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारत की शुरुआत शानदार रही और एक वक्त भारत का स्कोर 38 ओवरों में महज एक विकेट के नुकसान पर 250 रन बना लिए थे. मैच पर भारत की पकड़ मजबूत होती दिख रही थी, तभी टीम के विकेट जल्दी-जल्दी ढहना शुरू हो गए.
मैच के आखिरी ओवर में टीम इंडिया को जीत के लिए 9 रन चाहिए थे और मैदान पर कानितकर और श्रीनाथ थे. वहीं पाकिस्तान की तरफ से गेंदबाजी करने सकलैन मुश्ताक आएं, जिन्होंने मैच में 3 विकेट झटक रखे थे. उन्होंने बेहद सधी हुई गेंदबाजी की, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने चार गेंदों में दौड़कर 6 रन बना लिए थे. ऐसे में अंतिम दो गेंदों को 3 रनों की जरूरत रह गई और हालांकि फिर कानितकर ने चौका जड़कर भारत को विजेता बना दिया.
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