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नीतीश को संयोजक बनाने का प्लान फेल? उधर कैंडिडेट उतारने लगी JDU, क्या करेगी कांग्रेस
लोकसभा चुनाव में भाजपा से मुकाबले के लिए विपक्षी दलों ने गठबंधन तो बना लिया लेकिन आगे की राह मुश्किल दिख रही है. हर क्षेत्रीय दलों की अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं. यही वजह है कि सीट बंटवारे का पेंच हर राज्य में फंसा है. जी हां, I.N.D.I.A अलायंस की दिल्ली बैठक में नीतीश कुमार के नाराज होने की खबर आई तो कांग्रेस ने उन्हें मनाने की कोशिश की. कहा गया कि मल्लिकार्जुन खरगे का नाम पीएम कैंडिडेट के तौर पर सामने आने से वह नाराज हो गए. उन्हें खुद को संयोजक बनाए जाने की उम्मीद थी. जेडीयू पैरवी भी कर रही थी लेकिन अब तक कोई सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला है. कल ऑनलाइन खरगे-लालू और नीतीश की बैठक की खबर भी आई लेकिन नीतीश को संयोजक बनाने पर कोई फैसला नहीं हुआ. कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार के लिए अच्छी खबर देने वाली वो बैठक ही टल गई. यह सब चल ही रहा था कि नीतीश कुमार की पार्टी ने लोकसभा चुनाव के लिए अपने कैंडिडेट उतारने शुरू कर दिए.
नीतीश ने कांग्रेस पर बनाया प्रेशर!
जी हां, जेडीयू का यह कदम कांग्रेस की बेचैनी बढ़ा सकता है. मुख्य विपक्षी दल नहीं चाहेगा कि राहुल गांधी की दूसरी यात्रा शुरू होने से पहले ही गठबंधन के साथी बिखरते दिखें. इसका संदेश जनता में ठीक नहीं जाएगा और भाजपा भी भुना सकती है. आज की तारीख में गठबंधन पर संकट दिखाई दे रहा है. कहा जा रहा था कि खरगे को गठबंधन का चेयरपर्सन और नीतीश को संयोजक बनाया जाना था लेकिन यह फैसला लटक गया है. अब जेडीयू ने अरुणाचल प्रदेश पश्चिम लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है. जेडीयू महासचिव ने एक बयान में बताया है कि पार्टी ने अरुणाचल की सीट से स्टेट प्रेसिडेंट Ruhi Tangung को टिकट दिया है. इस फैसले को जेडीयू की तरफ से कांग्रेस को बड़ा संदेश माना जा रहा है. शायद वह बिहार से बाहर भी गठबंधन में सीटें चाहती है.
यह नीतीश की प्रेशर पॉलिटिक्स ही है. पिछले दिनों पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नीतीश चाहते हैं कि गठबंधन में उनकी राय को तवज्जो मिले और वह संयोजक बनें. उनकी पार्टी का तर्क है कि विपक्षी मोर्चा बनाने की पहल नीतीश ने ही की थी. नीतीश के दांव से कांग्रेस असमंजस में दिख रही है.
आरजेडी और जेडीयू में तनातनी
बिहार में समीकरण पहले से जटिल है. जेडीयू और आरजेडी में अंदरूनी तनातनी चल रही है. लालू प्रसाद यादव चाहते हैं कि नीतीश अब तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाकर खुद राष्ट्रीय राजनीति में चले जाएं. बताते हैं कि इस पर सहमति न बनती देख आरजेडी ने जेडीयू को तोड़ने की कोशिशें शुरू कर दीं. कुछ दिन पहले कहा जा रहा था कि ललन सिंह आरजेडी के करीब जा रहे हैं. वास्तव में नीतीश ने अपने लिए प्लान-बी तैयार रखा है. वह सोच रहे हैं कि अगर लोकसभा चुनाव में कोई फायदा नहीं हुआ तो राज्य की सत्ता कम से कम उनके पास ही रहे.
गठबंधन में सीट बंटवारे का क्या हुआ?
यह इतना आसान नहीं है. बिहार की 40 सीटों में से जेडीयू और आरजेडी ने अपने लिए 17-17 सीटों पर दावेदारी पेश की है. बची छह सीटों में से ये 4 सीटें कांग्रेस और 2 सीटें वाम दलों को देना चाहते हैं. इस फॉर्मूले पर कांग्रेस राजी नहीं है.
खबर यह भी आ रही है कि नीतीश कुमार लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी चाहते हैं. फिलहाल तेजस्वी यादव से कल ईडी की पूछताछ पर सबकी नजरें हैं. अगर कोई कार्रवाई हुई तो बिहार की सियासत में उलटफेर देखने को मिल सकता है.