राजनीति
झगड़ा सुलझने के आसार, 2.30 बजे शिवपाल- अखिलेश के साथ मुलायम की प्रेस कॉन्फ्रेंस
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- October 25, 2016
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समाजवादी पार्टी में पिछले तीन दिनों से जारी हाईवोल्टेज़ ड्रामे के बाद अब सुलह के संकेत दिखाई दे रहे हैं. अखिलेश की तरफ से 23 अक्टूबर को बर्खास्त किए गए शिवपाल यादव सहित सभी नेताओं की मंत्रिमंडल में वापसी होगी.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल यादव सहित चार मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था. शिवपाल यादव के अलावा ओमप्रकाश सिंह, नारद राय और शादाब फातिमा बर्खास्त किए गए थे.
LIVE UPDATES:
- समाजवादी पार्टी का झगड़ा सुलझने के आसार हैं, दोपहर ढाई बजे शिवपाल और अखिलेश के साथ मुलायम की प्रेस कॉन्फ्रेंस
- मुुलायम ने अखिलेश को घर बुलाया
- घर पर दोनों के बीच बैठक जारी
- जो नेताजी कहेंगे, वहीं करेंगे- शिवपाल यादव
- हम नेताजी के साथ हैं- शिवपाल यादव
- रजत जयंती में मौजूद होंगे सभी नेता- गायत्री प्रजापति
- हमने पार्टी के सभी नेताओं को न्यौता भेजा है-गायत्री प्रजापति
- सब लोग नेताजी में समाय हुए हैं- प्रजापति
- हम नंदी, नेताजी शिव हैं-प्रजापति
- रामगोपाल ने अमर सिंह पर साधा निशाना
- खोटे सिक्के ने असली सिक्के को बाहर कर दिया- रामगोपाल
- पार्टी से बाहर होने पर अमर सिंह ने मुलायम सिंह को गालियां दी थी- रामगोपाल
- नेताजी को गुमराह किया जा रहा है-रामगोपाल
- अमर चुनाव नहीं जिता सकते- रामगोपाल
- जनता अमर सिंह को सबक सिखाएगी- रामगोपाल
- पैसे के बल पर नहीं जीत सकते चुनाव-रामगोपाल
- बर्खास्त किए गए चारों नेता मुलायम सिंह के साथ बैठक कर रहे हैं
जानें कौन हैं ये चार मंत्री
शिवपाल यादव: कुछ दिनों पहले मुख्तार की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय हुआ था. लेकिन अखिलेश नहीं चाहते थे कि कौमी एकता दल का विलय सपा में हो. इसके बाद कुछ और घटनाएं हुईं जिसकी वजह से सपा सुप्रीमो मुलायम के परिवार में कलह के हालात बने. कि सपा में कौमी एकता दल विलय के बाद अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच तल्खी और बढ़ सकती है.
वहीं अखिलेश के चाचा शिवपाल यादव को पिछले महीने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. इससे पहले यह पद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास था. अखिलेश से ये पद छीनने के बाद ही अखिलेश की चाचा शिवपाल से अनबन सुर्खियों में आई थी.
ओमप्रकाश सिंह: ओमप्रकाश सिंह बर्खास्त होने से पहले यूपी के पर्यटन मंत्री थे. सपा में अंसारी बंधुओं के विलय का सबसे ज्यादा विरोध पहले पर्यटन मंत्री ओमप्रकाश सिंह करते थे, लेकिन बदले हुए राजनैतिक परिवेश में उन्होंने अपने गुरु मुलायम सिंह का चरखा दांव आजमाया और राजनीतिक जीत को अपने पाले में कर लिया.
पर्यटन मंत्री के समर्थकों ने दो-तीन माह पहले से ही हर चट्टी-चौराहों पर कहना शुरू कर दिया था कि अंसारी बंधुओं के एसपी में आने से उनका कोई विरोध नहीं है. यह मामला पार्टी हाईकमान तय करेंगे.
नारद राय: शिवपाल के करीबी कहे जाने वाले नारद राय के पास विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय था. नारद राय बलिया सदर से दो बार विधायक रह चुके हैं. अखिलेश सरकार में इसके पहले भी मंत्री बनाए गए थे, लेकिन बाद में हटा दिए गए थे. पद से हटाने की वजह बलिया नगरपालिका में एक टेंडर का विवाद था, जिसमें इनके बेटे पर मारपीट का आरोप है.
राय पर आय से अधिक संपत्ति के साथ विधानसभा चुनाव के समय दाखिल घोषणा पत्र में अपनी पहली पत्नी के बेटे नरेंद्र और बेटी नेहा के बारे में विवरण नहीं देने, अपनी लखनऊ, गाजियाबाद, वाराणसी और बलिया की जमीन का दाम कम दिखाने, भतीजे जय प्रकाश राय की स्वास्थ्य विभाग में अनियमित नियुक्ति कराने का आरोप है.
शादाब फातिमा: शादाब फातिमा जहूराबाद विधानसभा से विधायक और बर्खास्त होने से पहले राज्य की महिला कल्याण मंत्री थीं. महिला कल्याण से जुड़ी सभी योजनाएं और क्रियान्वयन इसी मंत्रालय के जरिए होता है.
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