अपराध समाचार
गौशाला में भ्रष्टाचार से गायों की मौत का सिलसिला जारी, 8000 गायों का अस्तित्व खतरे में
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- August 06, 2016
- By sochindia
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जयपुर। हिंगोनिया गौ शाला में गायों की मौत की बाढ़ के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने जांच शुरु कर दी, एसीबी की जांच में सामने आया है कि गौशाला में कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार गायों की मौत और दुर्दशा की वजह बन गया है। वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे को राजस्थान विधानसभा में उठाने का फैसला किया है। गौशाला में लगातार तीसरे दिन भी गायों की मौत का सिलसिला नहीं थमा है। जयपुर की हिंगौनिया गौशाला की कमजोर और भूखी गायों के लिए कुछ कदम चल पाना भी मुश्किल है।
ये हालत तब है जब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम गौशाला में गायों की मौत और कुप्रबंधन की जांच कर रही है। एसीबी ने जांच के बाद पाया कि गायों की इस दुर्दशा और मौत की सबसे बड़ी वजह है गौशाला का कुप्रबंधन। गौशाला में सुपरिटेंडिंग इंजीनियर से लेकर निदेशक तक के अधिकारी तैनात है। लेकिन हैरानी ये कि उनकी मॉनिटरिंग एक कपांउडर स्तर का कर्मचारी कर रहा है।
एंटी करप्शन ब्यूरो राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच कर रहा है। अब एसीबी अपनी रिपोर्ट राजस्थान हाईकोर्ट में पेश करेगी, खुद गौशाला प्रबंधन भी मान रहा है कि रोजाना 30 से 35 गायों की मौत हो रही है। लेकिन बारिश के बाद कीचड़ से मौतों का आंकड़ा बढ़ गया।
पिछले पांच साल से हिंगोनिया गौशाला गायों की लगातार मौत की वजह से बदनाम है। हालात इतने बदतर हैं कि गौशाला के ज्यादतर कर्मचारी वेतन नहीं मिलने से हड़ताल पर हैं। आठ हजार गायों की देखभाल भगवान भरोसे है। एक आंकड़े के मुताबिक यहां हर महीने 1000 गायों की मौत हो रही है। गौशाला का सालाना बजट 15 करोड़ है इनमें 10 करोड़ चारे पर खर्च हो रहे हैं।
हैरानी ये है कि बावजूद गायें भूख से मर रही हैं। 17 पशुचिकित्सक, 40 नर्सिंगकर्मी समेत 60 कर्मचारी और आईसीयू के बावजूद गायों की मौत का सिलसिला बदस्तूर जारी है। सवाल ये कि कहां हैं गोरक्षा के नाम पर सरेआम गुंडागर्दी करने वाले?
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