टेक्नोलॉजी
गूगल ने लॉन्च किया वॉयस QR कोड वाला UPI बेस्ड पेमेंट एप ‘तेज’
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- September 18, 2017
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गूगल ने भारत के लिए खास तौर पर नया पेमेंट एप तेज पेश किया है. यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेश यानी यूपीआई आधारित इस नए एप के जरिए भुगतान करने या हासिल करने के लिए सामने वाले के पास भी तेज एप होना या क्विक रिस्पांस यानी क्यू आर होना जरुरी नहीं. और हां, भुगतान की ये व्यवस्था पूरी तरह से मुफ्त है.वित्त मंत्री अरुण जेटली ने तेज का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया.
कैसे करता है काम?
ये एप गूगल के प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. इसका इस्तेमाल एंड्रॉयड आधारित मोबाइल हैंडसेट और आईफोन, दोनों पर ही किया जा सकता है. फिर आपको सुरक्षा के लिए गूगल पिन या स्क्रीन लॉक सेट करना होगा. ऐसा करने के बाद एप को अपने बैंक खाते से जोड़ना होगा.
यदि आपका मोबाइल नंबर बैंक खाते से जुड़ा है तो ऐसे खाते एप से जुड़ जाएंगे. ये सब कर लिया तो फिर एप के विकल्पों पर जाइए, पैसे भेजिए या फिर ऑनलाइन खरीदारी करिए. एक विकल्प है कैश का. यदि आप और आपके दोस्त ने तेज डाउनलोड कर रखा है, तो बगैर किसी तरह की जानकारी साझा किए एक दूसरे को पैसा ट्रांसफर कर सकते है.
इस समय छोटे-बड़े 55 बैंक यूपीआई से जुड़े हुए है, इन सभी के खाताधारक तेज से जुड़ सकते हैं. लेन-देन सही तरीके से हो सके, इसके लिए चार बैंकों, भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक से हाथ मिलाया है. आपके सामने ये विकल्प होगा कि इनमें से किस बैंकं की भुगतान व्यवस्था को अपनाना चाहेंगे.
वॉयस बेस्ड QR कोड
एप की एक खासियत आवाज आधारित क्यू आर (क्विक रिस्पांस) कोड है. अभी विभिन्न दुकानों पर क्यू आर कोड को मोबाइल कैमरे से स्कैन करना होता है, उसके बाद जाकर भुगतान करना संभव हो पाता है. लेकिन नए एप में आवाज आधारित क्यू आर कोड हासिल किया जा सकता है. ऐसे में स्कैन वगैरह के झंझट से बचा जा सकेगा और पैसे का लेन-देन हो सकेगा.
स्पेशल ऑफर
नए एप को लोकप्रिय बनाने के लिए स्क्रैच कार्ड और लकी संडेज के रूप में ऑफर दिया गया है. स्क्रैच कार्ड के तहत 1000 रुपये तक का पुरस्कार जीता जा सकेगा. जितनी भी रकम आप जीतेंगे, वो तुरंत आपके बैंक खाते मे आ जाएगा. दूसरी ओर लकी संडेज के तहत 1 लाख रुपये तक का इनाम मिलेगा. और हां, इन सब के लिए आपको कोड याद रखने या ढ़ुंढ़ने की जरुरत नहीं होगी. विजेता के खाते में पैसा अपने आप आ जाएगा. ध्यान रहे कि ये दोनों एक तरह से कैश बैक है. कई मोबाइल वॉलेट या पेमेंट एप खरीदारी करने के बाद निश्चित रकम वापस कर देते हैं.
गूगल का दावा है कि एप के तहत किया जाने वाला लेन-देन पूरी तरह से सुरक्षित है. बैंक और एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के सुरक्षा इंतजामों के अलावा एप में खुद ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था मुहैया करायी गयी है. इसमें धोखाधड़ी पहचाने की व्यवस्था, गूगल पिन जैसे हैंडसेट में सुरक्षा और कैश मोड के जरिए बगैर मोबाइल नंबर या खाता नंबर साझा किए लेन-देन की व्यवस्था जैसे उपाय शामिल हैं.
नया एप हिंदी और अंग्रेजी के अलावा बांग्ला, मराठी, तमिल, तेलगू, कन्नड और गुजराती भाषा में उपलब्ध है.
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