अनिल कुंबले के नाम 956 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने का भारतीय रिकॉर्ड है दर्ज
टीम इंडिया की ओर से सर्वाधिक टेस्ट क्रिकेट विकेट लेने का रिकॉर्ड और टेस्ट की एक पारी के सभी 10 विकेट लेने के जिम लेकर के रिकॉर्ड की बराबरी करने वाले लिविंग लेजन्ड अनिल कुंबले को भारतीय क्रिकेट टीम का हाई प्रोफाइल कोच बनाया गया है. 2015 में वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप के बाद डंकन प्लेचर के जाने के बाद से ही यह पद खाली पड़ा था और रवि शास्त्री बतौर टीम निदेशक टीम से जुड़े हुए थे.
56 को पछाड़ बने हेड कोच
करीब एक महीने तक चले सलेक्शन प्रॉसेस में अनिल कुंबले को रवि शास्त्री, संदीप पाटिल, वेंकटेश प्रसाद, टॉम मूडी समेत 56 क्रिकेटरों पर तरजीह दी गई. बीसीसीआई ने 23 मई को हेड कोच के लिए आवेदन मांगे थे. 57 पूर्व क्रिकेटरों ने इसके लिए आवेदन भेजा. इनमें से 21 लोगों का नाम सलाहकार समिति को भेजा गया. सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर और वीवीएस लक्ष्मण की क्रिकेट सलाहकार समिति ने इनमें से करीब 10 लोगों का इंटरव्यू किया और अपनी रिपोर्ट बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को सौंप दी. इसके बाद गुरुवार की शाम लगभाग 18 महीने बाद टीम इंडिया को अनिल कुंबले के रूप में नया कोच मिल गया.
कोटला में इतिहास रचा
अनिल कुंबले भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे अधिक विकेट लेने वाले क्रिकेटर हैं. उन्होंने अपने करियर के दौरान 956 अंतरराष्ट्रीय विकेट लिए जो आज भी एक भारतीय रिकॉर्ड के रूप में दर्ज है. कुंबले क्रिकेट के चाहने वालों के लिए वो जुझारू नाम है जो टूटा जबड़ा लेकर क्रिकेट के मैदान पर उतरा और ब्रायन लारा जैसे दिग्गज का विकेट लिया. कुंबले ने टेस्ट की एक पारी की सभी 10 विकेट चटकाने का ऐतिहासिक कारनामा भी किया. 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ फिरोजशाह कोटला में खेले गए दिल्ली टेस्ट के दौरान उन्होंने यह अविस्मरणीय कारनामा किया था. जिम लेकर के बाद सभी 10 विकेट चटकाने का कारनामा करने वाले कुंबले एकमात्र क्रिकेटर हैं.
अपनी लेग स्पिन की बदौलत कुंबले क्रिकेट जगत के दिग्गज बल्लेबाजों को 18 सालों (1990 से 2008) तक परेशान करते रहे. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने जहां 619 विकेट (17 बार पांच विकेट, 8 बार 10 विकेट) लिए वहीं वनडे में 337 विकेट (10 बार पारी में चार विकेट) चटकाए. उन्होेंने टेस्ट क्रिकेट में एक शतक भी जड़ा. 2007 में राहुल द्रविड़ की कप्तानी में टीम इंडिया इंग्लैंड के दौरे पर गई तो ओवल टेस्ट के दौरान कुंबले ने 110 रन बनाए और पांच विकेट लेकर मैच ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभाई.
कंगारुओं को उन्हीं की धरती पर रौंदा
17 अक्टूबर 1970 को बंगलुरु में जन्मे कुंबले को नवंबर 2007 में टीम इंडिया की बागडोर सौंपी गई. उन्होंने 14 टेस्ट में भारत की कप्तानी की. इनमें से तीन में भारत जीता तो पांच हारा वहीं छह मैच ड्रॉ रहे. उनके ही नेतृत्व में भारतीय टीम ने कंगारुओं को पर्थ टेस्ट में उन्हीं की धरती पर 2008 में रौंद डाला था. ये वही दौरा था जब भारतीय टीम पर ऑस्ट्रेलियाई टीम ने नस्लवाद का आरोप लगाया था.
2008 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कुंबले ने कई प्रशासनिक पदों पर भी काम किया. वो नवंबर 2010 में कर्नाटक राज्य क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए. 2012 में कुंबले को आईसीसी क्रिकेट समिति का सदस्य और 2013 में इसका अध्यक्ष बनाया गया. इस पद पर उनका दोबारा चयन 2018 तक के लिए हुआ. बंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट एकेडमी के प्रमुख बनाए गए और साथ ही 2012 से 2015 तक बीसीसीआई की तकनीकी समिति का भी नेतृत्व किया.
वेस्टइंडीज दौरा पहला चैलेंज
2005 में पद्म श्री से सम्मानित कुंबले आईपीएल की फ्रेंचाइजी रॉयल चैंलेंजर्स ऑफ बैंगलोर और मुंबई इंडियंस के मेंटर भी रहे हैं. 2013 से 2015 के बीच उनके कार्यकाल के दौरान ही मुंबई की टीम दो बार आईपीएल चैंपियन भी बनी.
अब बतौर हेड कोच कुंबले का पहला दौरा जुलाई-अगस्त के दौरान वेस्टइंडीज का होगा जहां टीम इंडिया को चार टेस्ट मैच खेलने हैं.
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