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इराक में पकड़ा गया आत्मघाती बच्चा बम, शिया मस्जिद में करने वाला था धमाका!
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- August 23, 2016
- By sochindia
- in दुनिया, समाचार
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तुर्की में सीरिया की सीमा सटे शहर गाजियांटेप में एक साथ 51 कब्रें खोदी गईं। खुशी से झूमने वाले उन लोगों की कब्रें जो निकाह में शामिल होने आए थे लेकिन जनाजे की शक्ल में कब्रिस्तान तक पहुंच गए। एक मुल्क की खुशियों पर आत्मघाती धमाके का ग्रहण लग गया। कुछ अरसे में ये दुनिया में कहीं भी हुआ सबसे खौफनाक आत्मघाती हमला है, ज्यादा सदमे वाली बात ये है कि इस धमाके को महज 12 से 14 साल के एक आत्मघाती बच्चे ने अंजाम दिया था।
तुर्की के राष्ट्रपति के बयान से साफ है कि ये पता नहीं है कि आत्मघाती बच्चे ने खुद धमाका किया या उससे जबरदस्ती धमाका करवाया गया, लेकिन इसमें शक नहीं है कि आत्मघाती हमले के लिए सबसे खौफनाक हथियार बनते जा रहे हैं बच्चे। बच्चे जिन पर आसान से शक नहीं होता। बच्चे जो कहीं भी बेरोक-टोक चले जाते हैं।
ऐसा ही एक बच्चा पुलिस ने बगदाद के एक शहर किर्कुक से पकड़ा इस बच्चे की उम्र भी महज 12 से 13 साल ही है, इसे बगदादी के बेरहम हत्यारों ने भेजा था। वो एक शिया मस्जिद के पास पहुंचा था ताकि कमर में बांधी सुसाइड बेल्ट से विस्फोट कर खुदा की इबादत करने वालों की जान ले सके, लेकिन ये बच्चा ऐसा कर नहीं सका। इसके कपड़े उतरवा लिए गए। इसके कमर में बारूद से बंधी बेल्ट भी उतार ली गई।
इस बच्चे ने मशहूर फुटबॉलर लियोनेल मेसी के नाम वाली जर्सी पहनी हई थी। पुलिसवालों ने जब इसे पकड़ा तो ये बस रोने लगा। लेकिन, महज 12 से 13 साल की उम्र में इस बच्चे को आखिरी सफर पर भेजने वाले जानते थे कि वो क्या कर रहे हैं। ये जगह इराक की राजधानी बगदाद के उत्तर में पड़ने वाला शहर किर्कुक है। तारीख थी 21 अगस्त, रविवार। इशा की नमाज का वक्त था, यानी दिन की आखिरी नमाज। अंधेरा घिर चुका था और किर्कुक की शिया मस्जिद में इबादत करने वाले बढ़ते जा रहे थे। इस मौके पर कोई भी धमाका दर्जनों लोगों की जान ले सकता था-लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
नमाज शुरू होने से ठीक पहले पुलिस को लियोनेल मेसी की जर्सी पहने ये लड़का दिखा। शक हुआ तो इसे रोक लिया गया दोनों हाथ जकड़ लिए गए। जर्सी के भीतर सुसाइड बेल्ट देख सबके होश उड़ गए, और फौरन ही इस जगह को खाली करा लिया गया। इस बच्चे को जिस जगह और जिस हालत में पकड़ा गया था उसकी वजह से बम को डिफ्यूज करने का ऑपरेशन कहीं दूर नहीं हो सकता था।
लिहाजा वहीं बम डिस्पोजल एक्सपर्ट को बुलाया गया। उसने बम डिफ्यूज करने के बजाए-बेल्ट को उतारने का बेहद जोखिम भरा फैसला किया, लेकिन धीरे-धीरे प्लास से सुसाइड बेल्ट को काट दिया गया। और ना सिर्फ बड़ा आतंकी हमला बचा लिया गया बल्कि एक बचपन को आतंक का चारा बनने से भी बचा लिया गया।
लेकिन, ऐसा नहीं कि रविवार को इराक के किर्कुक में धमाका नहीं हुआ। इस बच्चे के पकड़े जाने से ठीक पहले शहर के अलग-अलग इलाके में दो धमाके किए गए। माना जा रहा है कि वो ध्यान भटकाने की कार्रवाई थी ताकि आत्मघाती बच्चे के जरिए बड़ा हमला किया जा सके। तुर्की में हुए सबसे भयानक आत्मघाती हमले के ठीक 24 घंटे बाद ये साजिश रची गई थी, तुर्की में हुए हमले को भी एक 14 साल के बच्चे ने ही अंजाम दिया है।