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उद्धव ठाकरे के सामने नया संकट! 27 मई से पहले चुनाव कराने के लिए आयोग ने दिया आदेश
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- May 01, 2020
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महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुख्यमंत्री बने रहने के लिए एमएलसी कुर्सी की आस देख रहे उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) के सामने एक नया संकट पैदा हो गया है. चुनाव आयोग ने प्रदेश की खाली पड़ी 9 एमएलसी सीटों पर चुनाव को मंजूरी दे दी है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री ठाकरे को विधान परिषद सीट पर मनोनीत करने के बजाय प्रदेश की खाली पड़ी 9 एमएलसी सीटों पर चुनाव कराने को लेकर निर्वाचन आयोग को चिठ्ठी लिखी थी. चुनाव आयोग ने 27 मई से पहले इन खाली सीटों पर चुनाव कराने के लिए कहा है.
गवर्नर ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में लिखा था कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) के केंद्र के निर्णय के बाद चुनाव टल गया था. सीएम उद्धव ठाकरे प्रदेश के दोनों सदनों में से किसी भी सदन के सदस्य अब तक नहीं बन पाए हैं और मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए सीएम ठाकरे को 28 मई से पहले एमएलसी बनने की संवैधानिक बाध्यता है.
इससे पहले आज सुबह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने गवर्नर भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात भी की. बता दें कि उद्धव ठाकरे की एमएलसी सीट का मामला प्रधानमंत्री की चौखट पर भी पहुंचा था. मुख्यमंत्री कुर्सी पर बने रहने के लिए उद्धव ठाकरे को 28 मई से पहले तक प्रदेश के किसी भी सदन की सदस्यता हासिल करनी होगी.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत किसी भी सदन से जुड़े न होने पर कोई भी शख्स 6 महीने तक ही मंत्रिमंडल में मंत्री या मुख्यमंत्री पद पर बना रह सकता है. अब बदले हुए राजनीति माहौल में सीएम उद्धव ठाकरे को 28 मई तक किसी भी एक सदन का सदस्य बनने की संवैधानिक बाध्यता है. अन्यथा उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ेगी.
दरअसल, बीते 26 मार्च को प्रदेश में 9 विधान परिषद सीटों पर चुनाव होना था लेकिन सूबे में कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे की वजह से चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया था. उद्धव ठाकरे की मंत्रिमंडल ने पिछली 9 अप्रैल को भी महाराष्ट्र के गवर्नर को सीएम उद्धव ठाकरे को एमएलसी मनोनीत करने की सिफारिशी चिठ्ठी राजभवन को भेजी थी.
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के तहत राज्यपाल को कुछ निश्चित संख्या में विधान परिषद में सदस्यों को मनोनीत करने का संवैधानिक अधिकार हासिल है. मनोनीत एमएलसी कला, साहित्य, विज्ञान, समाज सेवा बैकग्राउंड वाले व्यक्ति होना जरूरी हैं, तब जाकर अपने विवेक से राज्यपाल सदस्यों को मनोनीत करते हैं.
एनसीपी के विधायकों के इस्तीफे की वजह से दो सीटें खाली हुई थीं, जो पिछले साल के विधानसभा चुनावों से ऐन पहले बीजेपी में शामिल हो गए थे.
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