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LG से मिला शाहीन बाग का डेलिगेशन, स्कूली बसों और एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए तैयार हुए प्रदर्शनकारी
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- January 21, 2020
- By admin
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दिल्ली पुलिस के डीसीपी चिन्मय बिस्वास के साथ शाहीन बाग से 8 लोगों के डेलिगेशन ने एलजी से मुलाकात की. डेलीगेशन के 8 लोगों में 4 बुजुर्ग महिलाएं भी हैं. LG से मिले प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन को फौरन खत्म करने से इनकार कर दिया है. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगे. इसके अलावा प्रदर्शनकारी इस बात के लिए मान गए हैं कि शाहीन बाग में एंबुलेंस और स्कूली बसों को रास्ता दिया जाएगा. बता दें कि बीते एक महीने से ज्यादा समय से शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं.
शाहीनबाग की महिलाओं की दिल्ली के एलजी से मुलाकात खत्म होने के बाद उन्होंने कहा कि हम कोशिश करेंगे कि कोई रास्ता निकले. एलजी ने हमारी बातों को ध्यान से सुना. वो हमारी तकलीफ में शामिल हैं. शाहीनबाग रोड स्कूली बच्चों के लिए खोलने पर विचार करेंगे. वहीं सैयद तासिर अहमद ने कहा, ‘स्कूल की बसों को हम खुद निकलवाएंगे. परसों से एम्बुलेंस को तो हम खुद निकलवा रहे थे, हम लोग मुस्तैदी से ये काम करेंगे. एलजी साहब ने स्कूल की बस की बात की थी, अभी हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा. हमारी मांग सीएए को वापस लेने के लिए थी.’
डेलिगेशन के सदस्य तासीर अहमद ने कहा कि हमने अपनी बातें उनके सामने रखी हैं. एलजी ने कहा है कि ये मांगें ग्रह मंत्रालय तक पहुचाएंगे. तासीर अहमद का कहना है कि हमारा प्रोटेस्ट जारी रहेगा. हम कल के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार करेंगे. एम्बुलेंस, स्कूल बसों को रास्ता देंगे.
इससे पहले सोमवार को प्रदर्शनकारियों से मिलने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पहुंचे थे. दिग्विजय सिंह इन प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने के लिए पहुंचे थे. हालांकि उनको स्टेज पर बोलने का मौका नहीं दिया गया और वह वापस लौट आए थे. इस बीच कालिंदी कुंज रोड पर CAA के विरोध में धरना प्रदर्शन का मामला भी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था. वकील अमित साहनी ने SC में दायर याचिका में कहा था कि रोड जाम से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन दिल्ली HC ने स्थिति की मॉनिटरिंग को लेकर कोई खास दिशा निर्देश देने के बजाए पुलिस को उचित कदम उठाने को कहकर मामले का निपटारा कर दिया.
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि वहां बन रही स्थिति को और खराब होने से रोकने और हिंसक होने से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट अपने रिटायर्ड जज या दिल्ली HC के सेवारत जज से मॉनिटरिंग कराए.