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बीती रात से जारी बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी जमा; बसों-ट्रेनों की आवाजाही पर असर, एयरपोर्ट के रनवे पर भी वाटर लॉगिंग
मुंबई में गुरुवार देर रात से बारिश हो रही है। इससे शहर के निचले इलाकों- वडाला, सायन और गांधी मार्केट की सड़कों पर पानी जमा गया है। भारी बारिश के चलते बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने बसों के रूट में भी बदलाव किया है, तो हार्बर लाइन पर चलने वाली लोकल ट्रेन सर्विस भी प्रभावित हुई हैं।
भारी बारिश के चलते मुंबई एयरपोर्ट के रनवे पर भी पानी भर गया है। हालांकि, अभी उड़ानों के प्रभावित होने की जानकारी नहीं है। मुंबई के अलावा ठाणे और रायगढ़ के लिए भी मौसम विभाग ने बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है।
मध्य रेलवे CPRO के मुताबिक भारी बारिश और जलभराव के चलते कुर्ला-विद्याविहार के पास ट्रेनें 20-25 मिनट की देरी से चल रही हैं। स्लो लाइन ट्रैफिक कुर्ला-विद्याविहार को फास्ट लाइन पर डायवर्ट किया गया है। हार्बर लाइन पर भी ट्रेनें 20-25 मिनट की देरी से चल रही हैं। वहीं ट्रांस-हार्बर लाइन ट्रैफिक में कोई दिक्कत नहीं है।
मुंबई में एक हफ्ते में सामान्य से 77% ज्यादा बारिश
मुंबई में 1 जून से अब तक कुल 1291.8 मिमी बारिश हुई है। यह सामान्य से करीब 48% ज्यादा है। पिछले एक हफ्ते में ही मुंबई में लगभग 302 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 77% ज्यादा है। शहर में भारी बारिश को देखते हुए BMC ने लोगों से जलभराव वाले इलाकों में आवाजाही नहीं करने की अपील की है।
हरियाणा: कई जिलों में लगातार तीन दिन से हो रही बारिश
पानीपत, करनाल और सोनीपत समेत हरियाणा के कई जिलों में पिछले 3 दिनों से जोरदार बारिश हो रही है। गुरुवार को राज्य में 24 घंटे के अंदर 14 मिमी बारिश हुई। यह हर साल 15 जुलाई तक प्रदेश में होने वाली सामान्य (6.7 मिमी) बारिश से 109% ज्यादा है।
पानीपत में सबसे ज्यादा 57.4 मिमी बारिश दर्ज हुई। इसके बाद पारा सामान्य से 6 डिग्री तक कम हो गया। पानीपत में सड़कों पर पानी जमा होने से गुरुवार को करीब 5 किमी लंबा जाम लगा रहा। करनाल में 48.8 मिमी और सोनीपत में 46.1 मिमी बारिश दर्ज की गई। इससे सड़कों पर 2 से 3 फीट तक पानी जमा हो गया और कई घरों में भी पानी भर गया।
मध्य प्रदेश: विंड पैटर्न ठीक से न बनने के चलते मूवमेंट खराब
प्रदेश में मानसून को दस्तक दिए एक महीना होने को आया है, लेकिन पूरे राज्य में एक जैसी बारिश नहीं हुई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसका मुख्य कारण विंड पैटर्न का सपोर्ट नहीं करना और लो प्रेशर एरिया ठीक से नहीं बन पाना है। जो बने उनका जल्दी से वीक होना, या फिर उनका मूवमेंट ठीक नहीं रहना भी इसकी एक वजह है।
मध्य प्रदेश के 8 जिलों में औसत से 50% कम बारिश
प्रदेश में बारिश की स्थिति ऐसी है कि सिर्फ 8 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश हुई है। वहीं 8 जिले ऐसे हैं, जहां आंकड़ा 50% से भी कम है। कभी पूर्वी तो कभी पश्चिमी मध्य प्रदेश भीगता रहा, लेकिन इतना नहीं कि पूरा प्रदेश पानी-पानी हो जाए। अब भी कई ऐसे जिले हैं, जहां औसत से आधी बारिश भी नहीं हुई है। इस बार बारिश को ग्वालियर-चंबल संभाग के साथ मालवा-निमाड़ सबसे ज्यादा तरसा है।
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