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बसवराज बोम्मई ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, येदियुरप्पा ने ही सुझाया था उनका नाम; लिंगायत समुदाय भी राजी
बसवराज बोम्मई कर्नाटक के नए CM बन गए हैं। राजभवन में राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने बसवराज को पद की शपथ दिलवाई। इससे पहले सोमवार को विधायक दल की बैठक में इस्तीफा देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने ही मंगलवार को बोम्मई के नाम का प्रस्ताव रखा था। बसवराज के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। मोदी ने कहा है कि बसवराज अनुभवी हैं और भरोसा है कि वे कर्नाटक में हमारी सरकार द्वारा किए गए असाधारण कामों को आगे बढ़ाएंगे।
डिप्टी CM पर अभी फैसला नहीं
डिप्टी CM को लेकर मीडिया में अपने नाम की चर्चा को लेकर BJP नेता आर अशोक का कहना है कि पार्टी इस बारे में तय करेगी। वहीं केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने भी कहा है कि कर्नाटक में उप मुख्यमंत्री को लेकर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। बीजेपी का राष्ट्रीय नेतृत्व इस बारे में तय करेगा।
28 जनवरी 1960 को जन्मे बसवराज सोमप्पा बोम्मई CM की कुर्सी संभालने से पहले कर्नाटक के गृह, कानून, संसदीय मामलों के मंत्री भी थे। उनके पिता एसआर बोम्मई भी राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट बसवराज ने जनता दल के साथ राजनीति की शुरुआत की थी। वे धारवाड़ से दो बार 1998 और 2004 में कर्नाटक विधान परिषद के लिए चुने गए। इसके बाद वे जनता दल छोड़कर 2008 में भाजपा में शामिल हो गए। इसी साल वे हावेरी जिले के शिगगांव से विधायक चुने गए।
बसवराज सिंचाई के मामलों के एक्सपर्ट
इंजीनियर और खेती से जुड़े होने के नाते बसवराज को कर्नाटक के सिंचाई मामलों का जानकार माना जाता है। राज्य में कई सिंचाई प्रोजेक्ट शुरू करने की वजह से उनकी तारीफ होती है। उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्र में भारत की पहली 100% पाइप सिंचाई परियोजना लागू करने का श्रेय भी दिया जाता है।
येदियुरप्पा ने सुझाया बोम्मई का नाम
कर्नाटक के गृह मंत्री बसवराज बोम्मई येदियुरप्पा के चहेते और उनके शिष्य हैं। सूत्रों की मानें, तो येदियुरप्पा ने इस्तीफा देने से पहले ही बोम्मई का नाम भाजपा आलाकमान को सुझा दिया था। दरअसल, लिंगायत समुदाय के मठाधीशों के साथ हुई बैठक में येदियुरप्पा ने अपनी तरफ से इस नाम को उन सबके बीच रखा था।
कर्नाटक के मशहूर लिंगेश्वर मंदिर के मठाधीश शरन बसवलिंग ने बताया अगर येदियुरप्पा एक इशारा करते, तो पूरा समुदाय उनके लिए भाजपा के विरोध में उतर आता। चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पड़ती, लेकिन खुद येदियुरप्पा ने बसवराज बोम्मई की हिमायत की। लिंगायत समुदाय के होने की वजह से उनके नाम पर सभी मठाधीश जल्दी राजी हो गए।
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