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झारखंड में कल्पना सोरेन की होगी ताजपोशी? कांग्रेस प्रभारी गुलाम अहमद मीर- सिचुएशन बनेगी, तब देखेंगे
क्या हेमंत सोरेन अपनी जगह पर पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाएंगे? झारखंड की राजनीति में यह सवाल इस वक्त सुर्खियों में है. चर्चा की 2 बड़ी वजहें हैं- पहली वजह, हेमंत पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का लगातार कसता शिकंजा. ईडी हेमंत से 31 जनवरी यानी कल भी पूछताछ करने जा रही है.
दूसरी बड़ी वजह बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का एक दावा है. गोड्डा से सांसद दुबे के मुताबिक हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना की ताजपोशी करने में जुटे हैं, लेकिन हेमंत की पत्नी के नाम पर सोरेन परिवार के अन्य सदस्य खुश नहीं हैं.
इन कयासों और अटकलों पर एबीपी न्यूज़ ने झारखंड कांग्रेस के प्रभारी महासचिव गुलाम अहमद मीर से बात की.
मीर के मुताबिक गठबंधन के नेता सभी स्थितियों का सामना करने में सक्षम हैं और जब नए मुख्यमंत्री बनाने की नौबत आएगी तो हम उसे देख लेंगे. बीजेपी को इससे क्या करना है?
गुलाम अहमद मीर कहते हैं- गठबंधन में अभी सब कुछ स्टेबल है. बीजेपी को हेमंत से जुड़े मामले में जांच से ज्यादा दिलचस्पी झारखंड की सरकार में हैं. उनकी चाहत है कि कब सरकार गिर जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होगा.
क्या कल्पना सोरेन के नाम पर आप लोग राजी हैं? इस सवाल के जवाब में मीर कहते हैं- कांग्रेस को किसी नाम पर आपत्ति नहीं है, लेकिन यह मामला अभी का नहीं है. हालांकि, कोई सिचुएशन बनती है, तब हम सब मिलकर फैसला कर लेंगे और आप मीडिया को बता देंगे.
कल्पना के नाम की चर्चा क्यों, 3 प्वॉइंट्स
1. भविष्य में पावर ट्रांसफर करने में आसानी होगी- जेएमएम सूत्रों का कहना है कि कल्पना को सत्ता सौंपने की जो रणनीति है, उसके पीछे की सबसे बड़ी वजह भविष्य में आसानी से पावर ट्रांसफर है.
जेएमएम के रणनीतिकारों का मानना है कि यह जो ईडी का तूफान आया है, वो कुछ ही महीनों में समाप्त हो जाएगा और फिर 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले या बाद में हेमंत आसानी से मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आ सकते हैं. याद रहे कि झारखंड में सरकार का कार्यकाल दिसंबर तक है.
कल्पना को कुर्सी सौंपने की रणनीति के पीछे एक और वजह सियासी लड़ाई को मजबूत रखना है.
जेएमएम के एक विधायक नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं- विश्वस्त के पास सत्ता पास रहती है तो सियासी लड़ाई लड़ने में आसानी होती है. बिहार में लालू यादव का आप उदाहरण देख ही सकते हैं. ऐसे में हेमंत भी अपने विश्वासपात्र को ही कुर्सी देना चाहेंगे. अब विश्वासपात्र कौन हो सकता है, वो लोग समझ रहे हैं.
2. उपचुनाव के लिए गांडेय जैसी समान्य सीट खाली कराना- हाल ही में एक राजनीतिक घटनाक्रम में हेमंत सोरेन ने गिरिडीह के गांडेय सीट से विधायक सरफराज अहमद को इस्तीफा देने के लिए कहा था. गांडेय विधानसभा एक समान्य सीट है.
सूत्रों का कहना है कि हेमंत को अगर शिबू सोरेन या अपनी मां रूपी सोरेन को मुख्यमंत्री बनाना होता, तो किसी आदिवासी आरक्षित सीट को रिक्त करवाते, लेकिन हेमंत के द्वारा गांडेय जैसी समान्य सीट को खाली करवाया गया है.
कल्पना मूल रूप से ओडिशा के मयूरभंजन की रहने वाली हैं. 2006 में कल्पना और हेमंत की शादी हुई थी. झारखंड में कल्पना के आदिवासी कोटे से लाभ लेने को लेकर पहले भी बवाल मचता रहा है.
मूल निवासी नहीं होने की वजह से कल्पना झारखंड की आदिवासी रिजर्व सीट पर चुनाव नहीं लड़ सकती हैं. कहा जा रहा है कि यही वजह है कि हेमंत ने आदिवासी की बजाय समान्य सीट रिक्त करवाया.
3. कल्पना को एक साल से पब्लिक प्रोग्राम में ले जा रहे- मंगलवार को रांची में मुख्यमंत्री आवास पर विधायक दल की बैठक में पहली बार कल्पना सोरेन नजर आईं. हालांकि, पिछले एक साल से कल्पना को कई बार पब्लिक प्रोग्राम में हेमंत सोरेन के साथ मंच पर देखा गया है.
जेएमएम सूत्रों की मानें तो हेमंत कल्पना को पूरी तरह से ट्रेंड करने की कोशिश में जुटे हैं, इसलिए अधिकांश कार्यक्रमों में अपने साथ पत्नी को ले जाते हैं.
कल्पना के पक्ष में उनकी शिक्षा भी हैं. केंद्रीय विद्यालय से शुरुआती पढ़ाई करने वाली कल्पना के पास बीटेक और एमबीए की डिग्री भी है. वर्तमान में कल्पना रांची के एक स्कूल की निदेशिका पद पर कार्यरत हैं.
पार्टी और सहयोगी तैयार, परिवार को मनाने की कवायद जारी
झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कल्पना के नाम पर जेएमएम और कांग्रेस के नेता तैयार हैं, लेकिन परिवार में अभी सहमति नहीं बन पाई है. हेमंत के अलावा उनकी भाभी सीता सोरेन, भाई बसंत सोरेन, पिता शिबू सोरेन राजनीति में सक्रिय हैं.
सीता और बसंत तो विधायक भी हैं. ऐसे में कल्पना के नाम पर इन दोनों को तैयार करना हेमंत के लिए टेढ़ी खीर है.
हालांकि, संख्या बल हेमंत के पास है. वर्तमान में झारखंड विधानसभा में 80 विधायक हैं और सरकार के लिए 41 विधायकों की जरूरत है. जेएमएम के 28 और कांग्रेस के पास 16 विधायक है. सरकार को आरजेडी और माले के 1-1 विधायक का भी समर्थन प्राप्त है.
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