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चीन के भारत विरोधी एजेंडे पर चलने वाली ओली सरकार की किस्मत का फैसला आज
क्या चीन के भारत विरोधी एजेंडे पर चलने वाले ओली की सत्ता से विदाई तय है और क्या नेपाल में आज से चीन के राजनीतिक ‘अतिक्रमण’ पर अंकुश लग जाएगा?
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्थाई समिति की बैठक में इन सवालों का जवाब मिलने की उम्मीद है. आज होने वाली इस बैठक में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की किस्मत का फैसला हो सकता है.
आज ये तय हो सकता है कि ओली सत्ता में रहेंगे या नहीं. आज ये फैसला हो सकता है कि नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांकी का ओली बचाओ मिशन कामयाब होगा या नहीं.
दरअसल, नेपाल की सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में ओली के खिलाफ बगावत के सुर तेज हो गए हैं. पार्टी के सीनियर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री पुष्पकमल दहल प्रचंड प्रधानमंत्री ओली से नाराज हैं. दोनों के बीच हुई बैठक बेनतीजा रही. ऐसी खबरें हैं कि पार्टी की स्थायी समिति के 40 में 30 सदस्य ओली का इस्तीफा चाहते हैं.
इतने प्रचंड विरोध के बीच ओली के लिए सत्ता में बने रहना आसान नहीं होगा. उधर नेपाल की संसद का गणित भी प्रधानमंत्री ओली को परेशान कर रहा होगा.
नेपाल की संसद में कुल 275 सदस्य हैं. नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के 174 और मुख्य विपक्षी दल, नेपाली कांग्रेस के खाते में 63 सीट हैं.
ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि अगर केपी शर्मा ओली की सरकार गिरने की नौबत आई तो वो पार्टी को तोड़ भी सकते हैं. लेकिन सवाल है कि ओली के साथ उनकी पार्टी के कितने सांसद खड़े होंगे. और क्या ओली राजनीति के प्रचंड प्रहार का सामना कर पाएंगे. शायद ओली को इस बात का एहसास नहीं है कि जिस तरह उन्होंने चालबाज चीन के जाल में फंस भारत और नेपाल के बेटी—रोटी के रिश्तों में दरार डाली है, उससे नेपाल की जनता कितनी नाराज है. और ओली को जब तक इस बात का एहसास होगा, तब तक शायद बहुत देर हो जाएगी.